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LPG संकट के बीच सरकार का बड़ा फैसला मिनी सिलेंडर से कैसे मिलेगी राहत

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देश में चल रहे एलपीजी संकट के बीच केंद्र सरकार ने आम लोगों को राहत देने के लिए एक नई पहल शुरू की है। इसके तहत मिनी एफटीएल गैस सिलेंडर को एजेंसियों के माध्यम से उपलब्ध कराया जा रहा है, ताकि जिन लोगों के पास पारंपरिक गैस कनेक्शन नहीं है वे भी आसानी से गैस सिलेंडर खरीद सकें। इस सुविधा के तहत उपभोक्ता आधार कार्ड या किसी अन्य वैध पहचान पत्र के आधार पर मिनी सिलेंडर प्राप्त कर सकते हैं। सरकार का यह कदम उन लोगों के लिए राहत लेकर आया है जो लंबे समय से गैस की उपलब्धता और कीमतों को लेकर परेशान थे।

छात्रों और प्रवासी श्रमिकों को मिली बड़ी राहत

यह योजना विशेष रूप से छात्रों, प्रवासी मजदूरों और किराए के मकानों में रहने वाले लोगों के लिए काफी उपयोगी साबित हो रही है। अब तक ऐसे लोगों को गैस कनेक्शन न होने के कारण काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। पहले एलपीजी संकट से पहले भी ये लोग ब्लैक मार्केट से सिलेंडर खरीदते थे जो सामान्य कीमत से 100 से 200 रुपये महंगे मिलते थे। लेकिन हाल के संकट के दौरान यही सिलेंडर 6,000 से 7,000 रुपये तक पहुंच गया, जिससे आम आदमी के लिए इसे खरीदना लगभग असंभव हो गया। ऐसे में मिनी सिलेंडर एक किफायती और सुविधाजनक विकल्प के रूप में सामने आया है।

मिनी सिलेंडर की कीमत और उपयोगिता

सरकारी पहल के तहत मिनी एफटीएल सिलेंडर की कीमत लगभग ₹1,581 तय की गई है, जबकि 5 किलोग्राम गैस रिफिल मात्र ₹600 में उपलब्ध कराया जा रहा है। यह सिलेंडर छोटे परिवारों और अस्थायी रूप से रहने वाले लोगों के लिए बेहद उपयोगी है। एक मिनी सिलेंडर सामान्य परिस्थितियों में 15 से 20 दिनों तक आसानी से चल सकता है, जिससे दैनिक जरूरतों को पूरा किया जा सकता है। इस योजना को विशेष रूप से उन लोगों के लिए राहतकारी माना जा रहा है जो नियमित गैस कनेक्शन नहीं ले सकते या जिनके लिए पारंपरिक सिलेंडर महंगे साबित हो रहे हैं।

गैस उपलब्धता को लेकर सरकार और जनता के बीच स्थिति

देशभर में गैस सिलेंडर की उपलब्धता को लेकर लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं और कई जगहों पर ब्लैक मार्केटिंग के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। हालांकि सरकार का कहना है कि देश में एलपीजी, सीएनजी, पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं है और पर्याप्त भंडार उपलब्ध हैं। इसके बावजूद अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों जैसे ईरान में तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने के कारण आपूर्ति पर असर पड़ा है। सरकार इन चुनौतियों से निपटने के लिए प्रयास कर रही है और समुद्री मार्ग से आपूर्ति को सुचारु बनाने की दिशा में काम जारी है।

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