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Alankar Agnihotri: इस्तीफे के बाद बरेली पहुंचे अलंकार अग्निहोत्री, सरकार को दिया बड़ा अल्टीमेटम
इस्तीफे के बाद पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट और पीसीएस अधिकारी Alankar Agnihotri मंगलवार को बरेली पहुंचे। बरेली पहुंचते ही उन्होंने सरकार और प्रशासन के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल दिया। लाल फाटक स्थित परशुराम धाम पर उनके समर्थकों ने जोरदार स्वागत किया। हाथों में फूल मालाएं और बैनर लिए समर्थक देखो देखो शेर आया के नारे लगाते नजर आए। माहौल पूरी तरह राजनीतिक संदेशों और नारों से गूंजता रहा। मीडिया से बातचीत में अलंकार अग्निहोत्री ने अपने इस्तीफे के बाद पहली बार खुलकर प्रतिक्रिया दी और कहा कि वह दबाव और डर की राजनीति से पीछे हटने वाले नहीं हैं।
आरोप पत्र को बताया हास्यास्पद, कार्रवाई से नहीं डरने का दावा
मीडिया से बात करते हुए Alankar Agnihotri ने सरकार द्वारा दिए गए आरोप पत्र को पूरी तरह हास्यास्पद करार दिया। उन्होंने कहा कि अगर अपने हक और अपने समाज की बात करना गुनाह है तो वह यह जुर्म बार बार करेंगे। उन्होंने साफ कहा कि किसी भी तरह की कार्रवाई या नोटिस से उन्हें डर नहीं लगता। उनके अनुसार आरोप पत्र में कई तथ्य गलत हैं और सच्चाई को तोड़ मरोड़ कर पेश किया गया है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में अपनी बात रखना अपराध नहीं हो सकता। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह अपने लीगल एडवाइजर से सलाह लेकर आरोप पत्र का कानूनी जवाब देंगे और इस लड़ाई को अदालत तक ले जाने से पीछे नहीं हटेंगे।
एससी एसटी एक्ट पर बड़ा बयान, 7 फरवरी तक सरकार को अल्टीमेटम
पूर्व पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री ने एससी एसटी एक्ट को काला कानून बताते हुए केंद्र सरकार को 7 फरवरी तक का अल्टीमेटम दे दिया। उन्होंने कहा कि यह कानून समाज में भेदभाव को बढ़ावा दे रहा है और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है। उन्होंने मांग की कि संसद का विशेष सत्र बुलाकर इस कानून को समाप्त किया जाए। अलंकार अग्निहोत्री ने चेतावनी दी कि अगर 7 फरवरी तक सरकार ने इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया तो वह दिल्ली कूच करेंगे। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन सिर्फ व्यक्तिगत नहीं होगा बल्कि देशव्यापी रूप लेगा। उनके मुताबिक यह लड़ाई किसी एक व्यक्ति की नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की लड़ाई है।
सनातन परंपरा और राजनीति पर तीखा प्रहार
अलंकार अग्निहोत्री ने आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर ऐसे कानून बना रही है जिससे समाज बंटे और लोगों के बीच तनाव बढ़े। उन्होंने कहा कि जब कोई इसके खिलाफ आवाज उठाता है तो उसे दबाने की कोशिश की जाती है। प्रयागराज में शंकराचार्य से जुड़ी मारपीट की घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने प्रशासन से सार्वजनिक माफी की मांग की। उन्होंने कहा कि बटुकों की शिखा पकड़कर मारपीट करना बेहद शर्मनाक है और यह सनातन परंपरा का अपमान है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सनातन परंपरा के साथ ऐसा व्यवहार जारी रहा तो इसके गंभीर परिणाम होंगे। राजनीतिक दलों और नेताओं पर हमला बोलते हुए उन्होंने उन्हें रीढ़विहीन बताया और कहा कि आज के नेता बिना ऊपर से निर्देश मिले कोई फैसला नहीं ले पाते।