टेक्नॉलॉजी
Airtel का धमाका ऑफर: नया WiFi कनेक्शन लेने पर ₹700 का जबरदस्त डिस्काउंट, IPL 2025 स्पेशल
अगर आप अपने घर या ऑफिस के लिए नया Wi-Fi ब्रॉडबैंड कनेक्शन लेने की सोच रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए है। देश की प्रमुख टेलीकॉम कंपनी भारती एयरटेल (Bharti Airtel) अपने नए ग्राहकों के लिए एक शानदार ऑफर लेकर आई है। Airtel Xstream Fiber का नया कनेक्शन लेने पर आपको ₹700 तक का तगड़ा डिस्काउंट मिल सकता है।
एयरटेल का नया ऑफर क्या है?
यह ऑफर एयरटेल के क्रिकेट प्रमोशनल कैंपेन का हिस्सा है, जो IPL 2025 के दौरान लॉन्च किया गया है। जैसे-जैसे IPL का रोमांच बढ़ रहा है, Airtel ने भी अपने यूजर्स को लुभाने के लिए यह एक्सक्लूसिव ऑफर निकाला है। Airtel के मुताबिक यह डिस्काउंट सिर्फ नए ब्रॉडबैंड यूजर्स के लिए है। यदि आप पहली बार Airtel Xstream Fiber कनेक्शन लेते हैं, तो आपको ₹700 तक की छूट मिल सकती है।
डिस्काउंट कैसे मिलेगा?
इस ऑफर का लाभ उठाने के लिए आपको Airtel की ऑफिशियल वेबसाइट या Airtel Thanks App के जरिए नया ब्रॉडबैंड कनेक्शन बुक करना होगा। लेकिन ध्यान रखें, यह ऑफर चुने हुए शहरों में ही वैलिड है। इसलिए बुकिंग से पहले यह जांच लें कि आपके इलाके में Airtel Xstream Fiber की सर्विस उपलब्ध है या नहीं।
Airtel Xstream Fiber की खासियतें
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इंटरनेट स्पीड: 100 Mbps से लेकर 1 Gbps तक की हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड सुविधा।
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फ्री इंस्टॉलेशन और Wi-Fi राउटर: कंपनी की ओर से फ्री में राउटर और इंस्टॉलेशन सर्विस दी जाती है।
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OTT बेनिफिट्स: कुछ प्लान्स में Amazon Prime Video, Netflix और Disney+ Hotstar जैसे लोकप्रिय ओटीटी प्लेटफॉर्म्स की फ्री मेंबरशिप।
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24×7 कस्टमर सपोर्ट: Airtel की ग्राहक सेवा टीम दिन-रात आपकी मदद के लिए उपलब्ध रहती है।
लिमिटेड टाइम ऑफर
यह एक लिमिटेड टाइम ऑफर है जो केवल IPL 2025 के सीजन तक वैध रहेगा। यानी अगर आप ब्रॉडबैंड शिफ्ट करने या नया कनेक्शन लेने की सोच रहे हैं, तो यही सबसे सही मौका हो सकता है।
टेक्नॉलॉजी
साइबर अपराध पर डिजिटल स्ट्राइक की तैयारी, सरकार ने बनाया बड़ा सुरक्षा प्लान
पिछले कुछ वर्षों में साइबर क्राइम के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखी गई है। ऑनलाइन ठगी और डेटा चोरी के मामलों ने आम लोगों को आर्थिक नुकसान के साथ मानसिक तनाव भी दिया है। इसी गंभीर स्थिति को देखते हुए सरकार ने देशभर में साइबर अपराध के खिलाफ एक बड़ी रणनीति तैयार करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने साइबर फ्रॉड को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ते हुए कहा है कि डेटा चोरी और साइबर धोखाधड़ी देश के लिए बड़ा खतरा बन चुकी है। इस चुनौती से निपटने के लिए Indian Cyber Crime Coordination Centre के माध्यम से एक व्यापक योजना तैयार की जा रही है जो अलग अलग एजेंसियों को एक साथ जोड़कर काम करेगी।
2018 में हुई थी I4C की शुरुआत
I4C यानी इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर की स्थापना वर्ष 2018 में की गई थी। यह संस्था गृह मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करती है और देश में साइबर अपराध से निपटने के लिए एक नोडल एजेंसी के रूप में काम करती है। इसका मुख्य उद्देश्य विभिन्न राज्यों की पुलिस एजेंसियों बैंकिंग सिस्टम और अन्य संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है। I4C एक ऐसा प्लेटफॉर्म प्रदान करता है जहां सभी संबंधित एजेंसियां मिलकर साइबर अपराध की जांच और रोकथाम में सहयोग करती हैं। इससे न केवल मामलों की जांच तेज होती है बल्कि अपराधियों तक पहुंचना भी आसान हो जाता है।

शिकायत से लेकर कार्रवाई तक की पूरी प्रक्रिया
जब कोई नागरिक साइबर फ्रॉड की शिकायत हेल्पलाइन नंबर या ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से दर्ज करता है तो यह शिकायत सीधे I4C के अंतर्गत आने वाले सिस्टम में दर्ज हो जाती है। इसके बाद यह मामला ‘सिटीजन फाइनेंशियल साइबर फ्रॉड रिपोर्टिंग एंड मैनेजमेंट सिस्टम’ के माध्यम से संबंधित स्थानीय पुलिस और बैंक तक पहुंचता है। इस प्रक्रिया के जरिए ठगी के पैसे को तुरंत फ्रीज करने की कार्रवाई की जाती है ताकि अपराधियों को धन निकालने का मौका न मिले। रिपोर्ट के अनुसार इस प्रणाली के जरिए अब तक हजारों करोड़ रुपये की राशि को फ्रॉड होने से बचाया जा चुका है। इस पूरी प्रक्रिया के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया यानी SOP भी लागू है जिसमें पुलिस बैंक और अन्य एजेंसियां मिलकर काम करती हैं।
सिम कार्ड ब्लॉकिंग और सिम बाइंडिंग से कसा शिकंजा
सरकार केवल शिकायतों पर ही कार्रवाई नहीं कर रही है बल्कि साइबर अपराध में इस्तेमाल होने वाले सिम कार्ड और मोबाइल डिवाइस पर भी सख्ती बरत रही है। गृह मंत्रालय के अनुसार अब तक लाखों सिम कार्ड ब्लॉक किए जा चुके हैं और कई मोबाइल उपकरणों को भी निष्क्रिय किया गया है। इसके अलावा मैसेजिंग ऐप्स पर साइबर अपराध रोकने के लिए सिम बाइंडिंग को अनिवार्य किया जा रहा है। इस व्यवस्था के तहत यूजर का सिम और ऐप एक दूसरे से जुड़ा रहेगा जिससे फर्जी अकाउंट और धोखाधड़ी की संभावना कम हो जाएगी। सरकार ने सभी प्लेटफॉर्म्स को इसे लागू करने के लिए समय सीमा दी है और उम्मीद जताई जा रही है कि इन कदमों से साइबर अपराध के मामलों में उल्लेखनीय कमी आएगी।
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