देश
AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी बोले- भारत में ‘I Love Modi’ आसान, ‘I Love Muhammad’ पर विरोध और सवाल
उत्तर प्रदेश के बरेली में “I Love Muhammad” पोस्टर विवाद ने तूल पकड़ लिया है। पिछले हफ्ते इस पोस्टर को लेकर हिंसक प्रदर्शन हुए। इसके बाद इलाके में तनाव बना हुआ है। इंटरनेट सेवा चार जिलों में रोक दी गई थी और दशहरा व शुक्रवार की नमाज़ के मद्देनजर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी।
ओवैसी का बयान और सवाल
AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इस देश में “आई लव मोदी” कहना आसान है, लेकिन “आई लव मुहम्मद” कहना मुश्किल है। ओवैसी ने सवाल उठाया कि अगर किसी ने कहा कि मैं मुस्लिम हूँ क्योंकि मैं मुहम्मद के अनुयायी हूँ, तो इसमें गलत क्या है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपने हाथों से किसी प्रकार की हिंसा न करें।
#WATCH | Hyderabad, Telangana: AIMIM chief Asaduddin Owaisi says, "A case is going on for the Sambhal mosque. Our mosques are being snatched away. In this country, one can say 'I love Modi' but not 'I love Mohammad'. Where are you taking this nation? If someone says 'I love… pic.twitter.com/px41byair1
— ANI (@ANI) October 2, 2025
पुलिस की जवाबदेही पर सवाल
ओवैसी ने वीडियो क्लिप्स का हवाला देते हुए कहा कि उनमें साफ दिख रहा है कि पुलिस लोगों पर लाठीचार्ज कर रही है। कुछ दुकानदारों पर आरोप हैं कि उन्होंने पुलिस पर फूल बरसाए। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या पुलिस केवल सत्ता के प्रति जवाबदेह है या किसी और के प्रति नहीं। ओवैसी ने सरकार से पूछा कि इतने सारे कानून बनाने के बावजूद क्या हो रहा है।
प्रदर्शन और हिंसा
पिछले हफ्ते शुक्रवार की नमाज़ के बाद मस्जिद के बाहर 2,000 से अधिक प्रदर्शनकारी इकट्ठा हुए। वे “आई लव मुहम्मद” पोस्टर विवाद के विरोध में आयोजित विरोध प्रदर्शन को रद्द किए जाने पर नाराज थे। प्रदर्शनकारियों ने पत्थर फेंके, जिससे पुलिसकर्मी घायल हुए। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज किया। इससे इलाके में तनाव और बढ़ गया।
शांति बनाए रखने की चुनौती
बरेली में स्थिति अभी भी संवेदनशील बनी हुई है। प्रशासन ने सुरक्षा बढ़ा दी है और सख्त कदम उठाए जा रहे हैं ताकि कोई बड़ी घटना न हो। ओवैसी की अपील है कि विवादित मुद्दों को हिंसा के माध्यम से नहीं सुलझाया जाए। आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि प्रशासन और समुदाय मिलकर कैसे इस तनाव को कम करते हैं और शांति स्थापित करते हैं।
देश
गुजरात में आप प्रदेश अध्यक्ष की गिरफ्तारी पर सियासी घमासान, नेताओं ने उठाए सवाल
गुजरात की राजनीति में उस समय हलचल तेज हो गई जब आम आदमी पार्टी (AAP) के प्रदेश अध्यक्ष इशुदान गढ़वी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। इस कार्रवाई के बाद राज्य की सियासत गरमा गई है और विपक्षी दलों ने इसे लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला है। आम आदमी पार्टी का आरोप है कि यह गिरफ्तारी राजनीतिक द्वेष से प्रेरित है और पार्टी के बढ़ते प्रभाव को रोकने की कोशिश है।
आप के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि गुजरात में पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता के दुरुपयोग के जरिए विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है। वहीं दिल्ली की नेता और विधानसभा में विपक्ष की प्रमुख आतिशी ने भी सरकार पर गंभीर सवाल उठाए। उनका कहना है कि बीजेपी सरकार डर के कारण ऐसी कार्रवाई कर रही है क्योंकि जनता अब बदलाव चाहती है।
इस मामले में अरविंद केजरीवाल ने भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पिछले कुछ महीनों में गुजरात में आप कार्यकर्ताओं के खिलाफ बड़ी संख्या में एफआईआर दर्ज की गई हैं और कई लोगों को गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए खतरा बताते हुए कहा कि सरकार विरोधियों को दबाने का प्रयास कर रही है।
गिरफ्तारी को लेकर यह भी जानकारी सामने आई है कि इशुदान गढ़वी खंभालिया थाने में अपने कार्यकर्ताओं से मिलने पहुंचे थे, जहां पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। हालांकि पुलिस की ओर से गिरफ्तारी के कारणों को लेकर अभी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।
इशुदान गढ़वी का राजनीतिक सफर भी काफी दिलचस्प रहा है। एक साधारण किसान परिवार से आने वाले गढ़वी ने अपने करियर की शुरुआत पत्रकारिता से की थी और बाद में राजनीति में कदम रखा। 2021 में आम आदमी पार्टी में शामिल होने के बाद उन्होंने तेजी से पहचान बनाई और 2022 के विधानसभा चुनाव में उन्हें मुख्यमंत्री पद का चेहरा भी घोषित किया गया था।
इस पूरे घटनाक्रम ने गुजरात की राजनीति को एक बार फिर गरमा दिया है। जहां एक ओर आप इसे राजनीतिक उत्पीड़न बता रही है, वहीं सत्ताधारी पक्ष की ओर से अभी तक इस पर स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं आई है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है, खासकर जब राज्य में चुनावी माहौल धीरे-धीरे बन रहा है।
फिलहाल, यह गिरफ्तारी सिर्फ एक कानूनी कार्रवाई नहीं, बल्कि राजनीतिक बहस का केंद्र बन चुकी है, जो आने वाले समय में राज्य की राजनीति को प्रभावित कर सकती है।
देश
वित्त वर्ष 2027 की दमदार शुरुआत: शेयर बाजार में उछाल, निवेशकों ने कमाए 10 लाख करोड़
नए वित्त वर्ष 2027 के पहले ही दिन भारतीय शेयर बाजार ने जोरदार प्रदर्शन करते हुए निवेशकों को बड़ी राहत दी है। दो दिनों की गिरावट के बाद बाजार में जबरदस्त तेजी देखने को मिली। BSE Sensex 1,187 अंकों यानी 1.65% की बढ़त के साथ 73,134.32 पर बंद हुआ, जबकि Nifty 50 348 अंकों यानी 1.56% उछलकर 22,679.40 के स्तर पर पहुंच गया।
इस तेजी का सबसे बड़ा असर निवेशकों की संपत्ति पर देखने को मिला। एक ही कारोबारी सत्र में निवेशकों ने करीब 10 लाख करोड़ रुपये की कमाई कर ली। BSE में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप 412 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 422 लाख करोड़ रुपये हो गया।
किन सेक्टरों में रही तेजी?
मिड और स्मॉल-कैप इंडेक्स में 3% तक की मजबूती देखी गई। सेक्टोरल इंडेक्स में खासतौर पर PSU बैंक और मीडिया सेक्टर ने 3.7% की बढ़त दर्ज की। इसके अलावा मेटल, IT और ऑटो सेक्टर में भी करीब 2% की तेजी आई। बैंकिंग सेक्टर का प्रदर्शन भी मजबूत रहा और निफ्टी बैंक इंडेक्स 2.33% चढ़ा।
बाजार में तेजी के प्रमुख कारण
1. वैश्विक तनाव में कमी के संकेत
संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव कम होने के संकेतों ने बाजार में सकारात्मक माहौल बनाया। खबरों के अनुसार, युद्ध के जल्द समाप्त होने की उम्मीद से निवेशकों का भरोसा बढ़ा है, जिससे वैश्विक बाजारों में भी तेजी आई।
2. ग्लोबल मार्केट्स का सकारात्मक रुख
एशियाई और यूरोपीय बाजारों में भी अच्छी बढ़त देखने को मिली। जापान, कोरिया, अमेरिका और यूरोप के प्रमुख सूचकांकों में तेजी का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा। इससे निवेशकों का सेंटीमेंट मजबूत हुआ।
3. डॉलर और बॉन्ड यील्ड में गिरावट
अमेरिकी डॉलर इंडेक्स और बॉन्ड यील्ड में गिरावट भारत जैसे उभरते बाजारों के लिए फायदेमंद साबित हुई। इससे विदेशी निवेश (FII) के प्रवाह की संभावना बढ़ जाती है, जो बाजार को सपोर्ट देता है।
4. वैल्यू बाइंग का असर
पिछले कुछ महीनों में बाजार में गिरावट के चलते कई मजबूत कंपनियों के शेयर सस्ते हो गए थे। ऐसे में निवेशकों ने ‘वैल्यू बाइंग’ का मौका लिया, जिससे बाजार में खरीदारी बढ़ी और तेजी आई।
कुल मिलाकर, नए वित्त वर्ष की शुरुआत निवेशकों के लिए बेहद सकारात्मक रही है। यदि वैश्विक हालात स्थिर रहते हैं और निवेशकों का भरोसा बना रहता है, तो आने वाले दिनों में बाजार में और मजबूती देखने को मिल सकती है।
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