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भारत में 5G मुफ्त नहीं, कंपनियां मजबूर कर रही हैं 2GB प्लान खरीदने पर, जानें असली हकीकत

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भारत की टेलीकॉम कंपनियां 5G सेवाओं को उपयोगकर्ताओं के लिए मुफ्त बताती हैं, लेकिन इसमें एक बड़ा पकड़ है। 5G की तेज़ स्पीड का अनुभव लेने के लिए उपयोगकर्ताओं को 4G डेटा प्लान की तुलना में अधिक भुगतान करना पड़ रहा है। इसका कारण यह है कि 5G के फायदे केवल उन प्लान्स के साथ मिलते हैं जिनमें रोजाना 2GB या उससे अधिक डेटा शामिल होता है। इसका मतलब है कि उपयोगकर्ताओं को 1GB या 1.5GB डेटा वाले प्लान खरीदने के बजाय 2GB वाले प्लान खरीदने पड़ रहे हैं।

सीमित 5G डेटा

टेलीकॉम टॉक के अनुसार, रिलायंस जियो, एयरटेल और वोडाफोन आइडिया (Vi) तीनों कंपनियां 5G को मुफ्त बता रही हैं, लेकिन वास्तव में यह पूरी तरह मुफ्त नहीं है। एयरटेल और वोडाफोन आइडिया अपने ग्राहकों के लिए 5G डेटा की सीमा 300GB तक रखते हैं। इसका मतलब है कि मुफ्त 5G केवल 300GB तक ही उपलब्ध है। वहीं जियो के ग्राहकों के लिए कोई सीमा नहीं है। इसका निहितार्थ यह है कि मुफ्त 5G की सीमा और शर्तों के कारण उपयोगकर्ताओं को अतिरिक्त खर्च करना पड़ रहा है।

प्रीपेड प्लान्स में 5G की शर्तें

एयरटेल अपने प्रीपेड ग्राहकों को 1GB या 1.5GB दैनिक डेटा वाले प्लान में असीमित 5G डेटा नहीं देती। रिलायंस जियो भी इसी प्रकार की स्थिति में है। जियो के प्रीपेड उपयोगकर्ता भी 5G का अनुभव लेने के लिए कम से कम 2GB डेटा वाले प्लान खरीदने के लिए बाध्य हैं। जबकि वोडाफोन आइडिया के प्रीपेड प्लान में 1GB और 1.5GB डेटा के साथ भी असीमित डेटा का लाभ मिलता है। इस तरह, कंपनियों की शर्तें उपयोगकर्ताओं को महंगे प्लान्स खरीदने के लिए प्रेरित कर रही हैं।

5G प्लान क्यों नहीं लॉन्च हुए

टेलीकॉम कंपनियां अभी 5G कवरेज को पूरे देश में फैलाने के काम में लगी हैं। इस कारण कोई भी कंपनी अभी तक 5G प्लान लॉन्च नहीं कर पाई है। इसलिए 5G को 4G प्लान के साथ अतिरिक्त लाभ के रूप में पेश किया जा रहा है। इसका उद्देश्य उपयोगकर्ताओं को 5G से परिचित कराना है और भविष्य में नए प्लान्स की तैयारी करना है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में पूर्ण 5G कवरेज कम से कम 2027 तक नहीं आएगा।

चुनौतियां और उपयोगकर्ताओं की असुविधा

हालांकि उपयोगकर्ता 2GB या उससे अधिक डेटा वाले प्लान के लिए अधिक भुगतान कर रहे हैं, फिर भी हर जगह 5G उपलब्ध नहीं है। कई क्षेत्रों में इनडोर कवरेज कमजोर है और कॉल ड्रॉप जैसी समस्याएं आम हैं। इसका मतलब है कि 5G की पूरी क्षमता का अनुभव अभी सभी उपयोगकर्ताओं को नहीं मिल पा रहा है। टेलीकॉम कंपनियों के लिए यह चुनौती है कि वे कवरेज सुधारें और उपयोगकर्ताओं को बेहतर सेवा प्रदान करें।

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