मनोरंजन
22 घंटे काम, जमीन पर नींद और टूटे सपने — हितेन तेजवानी की टीवी इंडस्ट्री की दर्दभरी दास्तान
मनोरंजन जगत को अक्सर लोग ग्लैमर और शोहरत से जोड़कर देखते हैं लेकिन इसके पीछे की सच्चाई बहुत कठिन होती है। टीवी अभिनेता हितेन तेजवानी ने हाल ही में अपने 25 साल के करियर के संघर्षों को साझा किया। उन्होंने बताया कि इंडस्ट्री में टिके रहना आसान नहीं था। लंबे घंटे, आर्थिक तंगी और परिवार के लिए समय की कमी ने उनकी ज़िंदगी को बेहद चुनौतीपूर्ण बना दिया था।
दिन नहीं बस काम के घंटे गिनते थे
हितेन ने अपने शुरुआती दिनों की मेहनत का ज़िक्र करते हुए कहा कि उन्होंने 22 घंटे तक काम किया है। उन्होंने बताया कि शूटिंग खत्म करने के बाद सिर्फ घर जाकर फ्रेश होकर वापस सेट पर आना उनकी दिनचर्या थी। उन्होंने कई ड्राइवर रखे लेकिन कोई टिक नहीं पाया क्योंकि कोई भी उनके काम के घंटे झेल नहीं पाया। आखिर में उन्हें खुद गाड़ी चलानी पड़ती थी और कई बार थकान के कारण ड्राइव करते वक्त नींद भी आ जाती थी। एक बार तो उनकी गाड़ी डिवाइडर से टकरा गई थी लेकिन भगवान की कृपा से कुछ नहीं हुआ।
संघर्ष के दिनों की आर्थिक तंगी
हितेन ने बताया कि उनके करियर की शुरुआत में आर्थिक स्थिति बहुत खराब थी। लीड रोल करने के बावजूद उन्हें बहुत कम पैसे मिलते थे। उन्होंने कहा कि “सुकन्या” शो में उन्हें सिर्फ 1000 रुपये प्रतिदिन मिलते थे और महीने में सिर्फ 12 दिन शूट होता था। “कुटुंब” में भी उनकी फीस बहुत कम थी। उन्होंने याद किया कि जब पहली बार उन्हें 1 लाख रुपये का चेक मिला तो वह खुशी से झूम उठे थे। उन्होंने 30 दिनों तक बिना रुके काम किया था और जब वो चेक लेने गए तो उन्हें लगा जैसे मेहनत का फल आखिर मिल ही गया।
सेट पर फर्श ही बना बिस्तर
हितेन ने बताया कि टीवी इंडस्ट्री में “डबल शिफ्ट” का मतलब असली मेहनत होता है। सुबह 9 बजे से रात 9 बजे तक का शेड्यूल अक्सर सुबह 5 बजे तक खिंच जाता था और अगली शिफ्ट 7 बजे शुरू हो जाती थी। ऐसे में वह कई बार सेट पर ही फर्श पर सो जाते थे। कुछ क्रू मेंबर्स उनके लिए लाइट बंद कर देते ताकि उन्हें थोड़ी नींद मिल सके। यही उनके आराम का पल होता था।
संघर्ष से सफलता तक की प्रेरक कहानी
आज हितेन तेजवानी टीवी इंडस्ट्री का जाना-माना चेहरा हैं लेकिन उन्होंने जो संघर्ष किया वह प्रेरणा का उदाहरण है। उन्होंने कभी हार नहीं मानी और अपने काम को पूजा माना। उनकी कहानी साबित करती है कि ग्लैमर के पीछे भी दर्द और मेहनत की कहानी छिपी होती है। मेहनत से ही सपनों को हकीकत में बदला जा सकता है।