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Trent share price fall: ट्रेंट के शेयरों में भारी गिरावट, एक दिन में ₹13,000 करोड़ से ज्यादा का नुकसान

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Trent share price fall: ट्रेंट के शेयरों में भारी गिरावट, एक दिन में ₹13,000 करोड़ से ज्यादा का नुकसान

Trent share price fall: 6 जनवरी 2026 को भारतीय शेयर बाजार में ट्रेंट के शेयरों के लिए बुरा दिन साबित हुआ। कंपनी ने अपनी तिमाही रिपोर्ट में साल-दर-साल 17% की मजबूत राजस्व वृद्धि का दावा किया, लेकिन इसके बावजूद ट्रेंट के शेयरों में जबरदस्त गिरावट देखी गई। निवेशकों की उम्मीदों के विपरीत कंपनी के शेयरों में 8% से अधिक की गिरावट आई, जिससे कंपनी की बाजार पूंजी में ₹13,000 करोड़ से ज्यादा की भारी कटौती हुई। इस घटना ने निवेशकों के बीच भारी निराशा फैला दी है और कंपनी की बाजार में स्थिति पर सवाल खड़े हो गए हैं।

₹13,000 करोड़ से अधिक की गिरावट से कंपन की मार्केट कैप कमजोर

ट्रेंट के शेयरों में इस तेज गिरावट ने कंपनी की कुल बाजार पूंजी (मार्केट कैप) को सीधे प्रभावित किया। सोमवार को बाजार बंद होने तक ट्रेंट की मार्केट कैप ₹1,57,461.39 करोड़ थी, जो मंगलवार को ट्रेडिंग के दौरान ₹1,44,351.01 करोड़ तक गिर गई। इसका मतलब है कि मात्र एक दिन में कंपनी की मार्केट वैल्यू में ₹13,110.38 करोड़ की कमी आई। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह दबाव इसी तरह बना रहा तो आने वाले दिनों में शेयरों में और गिरावट आ सकती है, जिससे कंपनी के मूल्यांकन पर और भी अधिक दबाव पड़ेगा।

शेयर बाजार में ट्रेंट का प्रदर्शन

बुधवार को बीएसई पर लगभग दोपहर 1 बजे के आसपास ट्रेंट के शेयरों में भारी गिरावट देखने को मिली। इस दौरान कंपनी के शेयर ₹4095 पर ट्रेड कर रहे थे, जो पिछले दिन के मुकाबले 7.55% या ₹334.45 तक नीचे आ गए थे। ट्रेडिंग की शुरुआत ₹4219.90 के स्तर से हुई थी, लेकिन बाजार के दबाव के चलते यह तेजी से नीचे आ गया। कंपनी का 52 हफ्ते का उच्चतम स्तर ₹7349.95 था जबकि 52 हफ्ते का न्यूनतम स्तर ₹3931.45 रहा है। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि ट्रेंट के शेयर अभी भी अपने निचले स्तर के करीब ही ट्रेड कर रहे हैं।

निवेशकों के लिए चुनौती और भविष्य की संभावनाएं

ट्रेंट की तिमाही रिपोर्ट में अच्छे राजस्व वृद्धि के बावजूद शेयरों में आई इस गिरावट ने निवेशकों के बीच भारी असमंजस पैदा कर दिया है। विश्लेषकों का कहना है कि कंपनी के शेयरों पर इस दबाव के कई कारण हो सकते हैं, जैसे बाजार की स्थिति, निवेशकों की मनोदशा, या कंपनी के भविष्य के प्रदर्शन को लेकर अनिश्चितता। हालांकि, यह भी माना जा रहा है कि कंपनी की फंडामेंटल मजबूती इसे लंबी अवधि में बेहतर स्थिति में ला सकती है। निवेशकों के लिए यह जरूरी होगा कि वे सावधानी से बाजार की हलचल को समझें और अपने निवेश निर्णय सोच-समझकर लें। आने वाले दिनों में ट्रेंट के शेयरों की चाल पर नजर रखना बहुत महत्वपूर्ण होगा क्योंकि यह कंपनी के वित्तीय स्वास्थ्य का एक महत्वपूर्ण संकेतक माना जाएगा।

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भारतीय शेयर बाजार में सेंसेक्स और निफ्टी में भारी गिरावट, निवेशक दबाव में

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भारतीय शेयर बाजार में सेंसेक्स और निफ्टी में भारी गिरावट, निवेशक दबाव में

भारतीय शेयर बाजार बुधवार को फिर से बड़ी गिरावट के साथ खुला। सेंसेक्स अपनी शुरुआती बढ़त खोकर अब 1000 अंक से ज्यादा टूट चुका है और 77,100-77,200 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। वहीं, निफ्टी भी 300 से ज्यादा अंक गिरकर 23,900 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे चला गया। निवेशकों पर एनर्जी संकट, Essential Commodities Act के लागू होने और विदेशी निवेशकों की बिकवाली का दबाव साफ दिख रहा है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशक फिलहाल सतर्क हैं और पॉजिटिव खबरों के इंतजार में हैं।

टॉप गेनर्स और लूजर्स की स्थिति

दिन के कारोबार में Wipro, Tata Steel, Power Grid, Hindalco, Tech Mahindra के शेयरों में तेजी देखने को मिली। वहीं, बैंकिंग सेक्टर में दबाव रहा और Kotak Mahindra Bank, ICICI Bank, HDFC Bank, Axis Bank, Bajaj Finserv के शेयर गिरावट में रहे। ऑटो सेक्टर में भी बिकवाली देखी गई, जिसमें Mahindra & Mahindra, TVS Motors शामिल हैं। टॉप लूजर्स में Reliance Industries और Bharti Airtel भी शामिल रहे। विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक और घरेलू घटनाओं के चलते निवेशक सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं।

भारतीय शेयर बाजार में सेंसेक्स और निफ्टी में भारी गिरावट, निवेशक दबाव में

एशियाई और वॉल स्ट्रीट का रुख

बुधवार को एशियाई बाजारों में तेल की कीमतों में कमी के चलते तेजी देखी गई। जापान का निक्केई 225 1.36 प्रतिशत बढ़ा, जबकि टॉपिक्स 1.22 प्रतिशत की तेजी में रहा। दक्षिण कोरिया का कोस्पी 2.52 प्रतिशत और कोस्डैक स्मॉल-कैप 1.39 प्रतिशत बढ़ा। हांगकांग का हैंग सेंग इंडेक्स फ्यूचर्स 25,936 पर कारोबार करता दिखा। वहीं, वॉल स्ट्रीट मंगलवार को लाल निशान में बंद हुआ। S&P 500 0.21 प्रतिशत गिरकर 6,781.48 पर बंद हुआ और डॉव जोन्स 34.29 अंक या 0.07 प्रतिशत लुढ़ककर 47,706.51 पर बंद हुआ। नैस्डैक कंपोजिट 0.01 प्रतिशत बढ़कर 22,697.10 पर बंद हुआ।

क्रूड तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव

बुधवार सुबह कच्चे तेल की कीमतें हल्की गिरावट के बाद ऊपर चली गईं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ईरान में युद्ध समाप्त होने के संकेत मिलने के बाद WTI क्रूड 0.03 प्रतिशत गिरकर 83.43 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है। वहीं, ब्रेंट क्रूड 119.50 डॉलर से गिरकर 87-90 डॉलर के दायरे में आ गया। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) ने वैश्विक बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए 182 मिलियन बैरल से ज्यादा तेल आपातकालीन भंडार से जारी करने का प्रस्ताव रखा है। इससे तेल की सप्लाई में सुधार की उम्मीद है।

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EPF, EPS और EDLI स्कीम अपडेट: कर्मचारियों के लिए पारदर्शी और सुरक्षित नियम

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EPF, EPS और EDLI स्कीम अपडेट: कर्मचारियों के लिए पारदर्शी और सुरक्षित नियम

अगर आपकी सैलरी से हर महीने PF कटता है, तो यह खबर आपके लिए अहम है। केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया की अध्यक्षता में हुई EPFO की बैठक में फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के लिए ब्याज दर को 8.25 प्रतिशत पर बनाए रखने का निर्णय लिया गया। यह लगातार तीसरा साल है जब ब्याज दर में कोई बदलाव नहीं किया गया। EPFO के सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज़ (CBT) ने इसी दर की सिफारिश की थी। ग्लोबल मार्केट में उतार-चढ़ाव के बावजूद यह दर FD और PPF जैसी दूसरी सेविंग्स स्कीम के मुकाबले काफी आकर्षक मानी जाती है।

ब्याज दर की मंजूरी और कानूनी प्रक्रिया

CBT की सिफारिश अब वित्त मंत्रालय के पास भेजी जाएगी। मंत्रालय की मंजूरी मिलने के बाद ही 8.25 प्रतिशत ब्याज दर कानूनी रूप से लागू मानी जाएगी। मंजूरी के बाद लेबर मिनिस्ट्री एक सरकारी नोटिस जारी करेगी और तय ब्याज दर सब्सक्राइबर्स के अकाउंट में क्रेडिट हो जाएगी। इस प्रक्रिया से यह सुनिश्चित होगा कि हर कर्मचारी का पैसा सुरक्षित और समय पर उनके अकाउंट में पहुंचे। EPFO का यह कदम कर्मचारियों को भरोसा दिलाने के साथ-साथ सिस्टम की पारदर्शिता को भी बढ़ाएगा।

EPF, EPS और EDLI स्कीम अपडेट: कर्मचारियों के लिए पारदर्शी और सुरक्षित नियम

छोटे इनएक्टिव अकाउंट्स के लिए ऑटो-सेटलमेंट और SOP

बैठक में छोटे और इनएक्टिव अकाउंट्स के लिए बड़ा फैसला लिया गया। अब 1000 रुपये या उससे कम बैलेंस वाले अकाउंट्स के क्लेम ऑटोमैटिकली सेटल किए जाएंगे। इससे लगभग 1.33 लाख अकाउंट होल्डर्स को लाभ मिलेगा और 5.68 करोड़ रुपये उनके असली लाभार्थियों तक पहुंचेगा। इसके अलावा, EPFO ने नया आसान और डिजिटल स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) जारी किया है। SOP को पेपरलेस और ट्रांसपेरेंट बनाया गया है ताकि कंपनियों के लिए रेगुलेशन का पालन आसान हो और एफिशिएंसी बढ़े। इससे सिस्टम को यूजर-फ्रेंडली और करप्शन-फ्री बनाने में मदद मिलेगी।

EPFO ने अपनी नई Amnesty स्कीम भी पेश की है, जिसका मकसद पुराने विवादों को सुलझाना और जुर्माना माफ करना है। इससे कंपनियों को बिना किसी बड़ी पेनल्टी के अपने मसले सुलझाने का मौका मिलेगा। इसके अलावा, EPF, EPS और EDLI स्कीम के नए फॉर्मेट को सोशल सिक्योरिटी कोड 2020 के हिसाब से अपडेट किया गया है। इससे पेंशन और इंश्योरेंस नियम आसान, सुरक्षित और अधिक पारदर्शी बनेंगे। कुल मिलाकर यह कदम कर्मचारियों के हर पैसे की सुरक्षा, सिस्टम की पारदर्शिता और यूजर फ्रेंडली प्रक्रिया को सुनिश्चित करता है।

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पॉलीकैब इंडिया को आयकर विभाग का 327 करोड़ का नोटिस, शेयर बाजार में मचा हड़कंप

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पॉलीकैब इंडिया को आयकर विभाग का 327 करोड़ का नोटिस, शेयर बाजार में मचा हड़कंप

देश की प्रमुख वायर और केबल निर्माता कंपनी पॉलीकैब इंडिया को आयकर विभाग से 327.45 करोड़ रुपये का नोटिस मिलने के बाद शेयर बाजार में हलचल मच गई है। इस खबर के सामने आते ही कंपनी के शेयरों पर दबाव बढ़ गया और निवेशकों के बीच चिंता का माहौल दिखाई दिया। बुधवार को पॉलीकैब का शेयर 8548.40 रुपये के पिछले बंद भाव के मुकाबले लगभग 3.09 प्रतिशत गिरकर 8283.95 रुपये पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान कंपनी के करीब 0.14 लाख शेयरों की खरीद बिक्री हुई और कुल टर्नओवर लगभग 11.28 करोड़ रुपये रहा। इस गिरावट के बावजूद कंपनी का बाजार पूंजीकरण अभी भी करीब 1.24 लाख करोड़ रुपये बना हुआ है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी टैक्स डिमांड का नोटिस मिलने के बाद आने वाले दिनों में कंपनी के शेयरों में और उतार चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

नोटिस के पीछे क्या है आयकर विभाग की आपत्ति

आयकर विभाग की जांच के दौरान यह सामने आया कि कंपनी ने अपने वित्तीय दस्तावेजों में कुछ खर्चों को दिखाकर टैक्स देनदारी को कम करने की कोशिश की थी। विभाग के मुताबिक लगभग 41.87 करोड़ रुपये के खर्च को स्वीकार नहीं किया गया है और इसे आय में जोड़ दिया गया है। इसी आधार पर आयकर विभाग ने कंपनी को डिमांड नोटिस जारी किया है। यह नोटिस असेसमेंट ईयर 2024-25 के लिए मुंबई स्थित डिप्टी कमिश्नर ऑफ इनकम टैक्स की ओर से भेजा गया है। अधिकारियों का कहना है कि टैक्स कैलकुलेशन के आधार पर कुल 327.45 करोड़ रुपये की मांग बनती है। हालांकि इस मामले में कई तकनीकी और कानूनी पहलू भी जुड़े हुए हैं जिनकी वजह से मामला फिलहाल विवाद का विषय बन गया है।

पॉलीकैब इंडिया को आयकर विभाग का 327 करोड़ का नोटिस, शेयर बाजार में मचा हड़कंप

कंपनी ने बताया नोटिस में कैलकुलेशन की गलती

पॉलीकैब इंडिया ने इस नोटिस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि आयकर विभाग की ओर से भेजे गए डिमांड नोटिस में गणना संबंधी त्रुटियां हो सकती हैं। कंपनी का कहना है कि वास्तविक अस्वीकृत खर्च केवल 41.87 करोड़ रुपये का है लेकिन डिमांड नोटिस में इसे बढ़ाकर 327.45 करोड़ रुपये कर दिया गया है। कंपनी के मुताबिक यह अंतर संभवतः कैलकुलेशन या क्लेरिकल गलती की वजह से हुआ है। कंपनी ने अपने टैक्स सलाहकारों से चर्चा करने के बाद यह निष्कर्ष निकाला है कि इस त्रुटि को इनकम टैक्स एक्ट के प्रावधानों के तहत सुधारा जा सकता है। इसी कारण कंपनी ने संबंधित अधिकारियों के सामने सुधार के लिए आवेदन दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

निवेशकों की नजर आगे की कार्रवाई पर

कंपनी ने स्पष्ट किया है कि वह इस मामले में कानूनी प्रक्रिया का पालन करेगी और जरूरत पड़ने पर उच्च अधिकारियों के सामने अपील भी करेगी। पॉलीकैब ने बताया कि आयकर विभाग ने इनकम टैक्स एक्ट 1961 की धारा 143(3) के तहत असेसमेंट ऑर्डर पास किया है और उसी आधार पर धारा 156 के तहत डिमांड नोटिस जारी किया गया है। कंपनी का मानना है कि धारा 154 के तहत सुधार की प्रक्रिया के जरिए इन त्रुटियों को ठीक किया जा सकता है और डिमांड राशि में बड़ी कमी आ सकती है। गौरतलब है कि पॉलीकैब के शेयरों ने पिछले तीन वर्षों में लगभग 170 प्रतिशत और पिछले पांच वर्षों में 513 प्रतिशत का शानदार मल्टीबैगर रिटर्न दिया है। ऐसे में निवेशक अब इस मामले के अगले कदम और कंपनी की कानूनी रणनीति पर नजर बनाए हुए हैं।

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