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पी. चिदंबरम का बड़ा खुलासा! ऑपरेशन ब्लू स्टार एक बड़ी गलती थी, इंदिरा गांधी को चुकानी पड़ी कीमत

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पी. चिदंबरम का बड़ा खुलासा! ऑपरेशन ब्लू स्टार एक बड़ी गलती थी, इंदिरा गांधी को चुकानी पड़ी कीमत

पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने हिमाचल प्रदेश के कसौली में खुषवंत सिंह साहित्य महोत्सव में ऑपरेशन ब्लू स्टार पर अपनी राय व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह एक गंभीर गलती थी, जिसकी कीमत पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने अपनी जान देकर चुकाई। चिदंबरम ने स्पष्ट किया कि आतंकवादियों को पकड़ने और सफाई करने का कोई और तरीका हो सकता था, लेकिन ऑपरेशन ब्लू स्टार गलत था। उन्होंने कहा कि यह गलती केवल इंदिरा गांधी की नहीं थी, बल्कि सेना, पुलिस, खुफिया और सिविल सेवा की संयुक्त निर्णय प्रक्रिया का परिणाम थी।

सेना या अधिकारियों का अपमान नहीं

कार्यक्रम के दौरान चिदंबरम ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका किसी भी सैन्य अधिकारी के प्रति कोई अपमान नहीं है। उन्होंने कहा कि गोल्डन टेम्पल को पुनः कब्जा करने के लिए सेना को ऑपरेशन से अलग रखा जाना चाहिए था। उन्होंने बताया कि कुछ वर्षों बाद भारत ने सही तरीके से गोल्डन टेम्पल पर नियंत्रण किया, जिसमें सेना को शामिल नहीं किया गया। चिदंबरम ने कहा, “सेना के किसी अधिकारी का अपमान नहीं है, लेकिन ऑपरेशन ब्लू स्टार गोल्डन टेम्पल को पुनः कब्जा करने का गलत तरीका था।”

पी. चिदंबरम का बड़ा खुलासा! ऑपरेशन ब्लू स्टार एक बड़ी गलती थी, इंदिरा गांधी को चुकानी पड़ी कीमत

इंदिरा गांधी की कीमत

चिदंबरम ने यह भी कहा कि ऑपरेशन ब्लू स्टार की वजह से इंदिरा गांधी ने अपनी जान गंवाई। हालांकि यह निर्णय केवल उनकी नहीं थी, बल्कि यह एक संयुक्त निर्णय था। उन्होंने यह बात जोर देकर कही कि इस घटना में सेना, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की भी जिम्मेदारी थी। चिदंबरम के अनुसार, ऑपरेशन ब्लू स्टार ने इतिहास में एक गहरी छाया डाली, लेकिन इसके बाद सही तरीके से समाधान निकालकर धार्मिक स्थल को शांतिपूर्ण ढंग से वापस लिया गया।

पंजाब की असली समस्या: आर्थिक स्थिति

चिदंबरम ने पंजाब की मौजूदा स्थिति पर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि पंजाब की वास्तविक समस्या राजनीतिक अलगाववाद नहीं है, बल्कि आर्थिक स्थिति है। उनके अनुसार, पंजाब में खालिस्तान और अलगाववाद का राजनीतिक नारा अब लगभग समाप्त हो गया है। उन्होंने कहा कि उनकी कई यात्राओं के दौरान उन्हें यह महसूस हुआ कि लोगों की असली चिंता रोजगार, विकास और आर्थिक स्थिरता से जुड़ी हुई है।

साझा जिम्मेदारी और सीख

चिदंबरम ने यह संदेश भी दिया कि इतिहास से सीख लेना जरूरी है। ऑपरेशन ब्लू स्टार जैसी घटनाओं में केवल एक व्यक्ति को दोषी ठहराना सही नहीं है। सभी संबंधित संस्थाओं की भूमिका और निर्णय प्रक्रिया को समझना आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में ऐसी संवेदनशील परिस्थितियों में सही रणनीति और शांतिपूर्ण समाधान अपनाना ही देश और समाज के लिए लाभकारी होगा।

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Himanta Biswa Sarma वीडियो विवाद में फंसे, FIR न होने पर विपक्ष ने कोर्ट में मामला दायर किया

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Himanta Biswa Sarma वीडियो विवाद में फंसे, FIR न होने पर विपक्ष ने कोर्ट में मामला दायर किया

असम के मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं। कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) और CPI ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है और उनसे कार्रवाई की मांग की है। वरिष्ठ वकील निज़ाम पासा, जो याचिकाकर्ता का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, ने मामले की जल्दी सुनवाई की अपील की है। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस (CJI) ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि जैसे-जैसे चुनाव करीब आते हैं, चुनाव का एक हिस्सा सुप्रीम कोर्ट में भी लड़ाई में बदल जाता है।

तुरंत हस्तक्षेप की मांग

याचिकाकर्ता के वकील ने चीफ जस्टिस के समक्ष कहा, “हम इस कोर्ट से तुरंत हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं। असम के वर्तमान मुख्यमंत्री के कुछ बेहद परेशान करने वाले भाषण सामने आए हैं। हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट हुआ है जिसमें वह एक विशेष समुदाय के लोगों पर गोली चलाते दिख रहे हैं। इस संबंध में शिकायतें दर्ज कराई गई हैं, लेकिन अभी तक कोई FIR दर्ज नहीं की गई है।” इस मांग पर CJI ने कहा कि वह मामले पर विचार करेंगे और सुनवाई की तारीख निर्धारित करेंगे।

Himanta Biswa Sarma वीडियो विवाद में फंसे, FIR न होने पर विपक्ष ने कोर्ट में मामला दायर किया

हिमंता बिस्वा शर्मा के विवादित बयान

Himanta Biswa Sarma के हालिया बयान पूरे राज्य में हलचल पैदा कर चुके हैं। पिछले सप्ताह उन्होंने कांग्रेस पार्टी को ‘बांग्लादेशी घुसपैठियों का समर्थक’ कहा और पूछा कि क्या पार्टी असम के लोगों के साथ है या “मियाँ” समुदाय के साथ। एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान गोलाघाट में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा, “कांग्रेस को स्पष्ट करना चाहिए कि वह असमिया लोगों के साथ है या मियाँ समुदाय के साथ। मियाँ शब्द मुख्यतः असम में बंगाली भाषी मुस्लिम समुदाय के लिए इस्तेमाल किया जाता है। गैर-बंगाली भाषी लोग आमतौर पर इन्हें बांग्लादेशी घुसपैठी मानते हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि मियाँ लोग पहले असम के पश्चिमी हिस्सों जैसे बारपेटा और ढुबरी में बसे थे, लेकिन अब वे डूलियाजन और मार्गेरिटा जैसे शहरों तक फैल चुके हैं।

वीडियो को लेकर विवाद

हिमंता बिस्वा शर्मा एक वीडियो को लेकर भी विवाद में फंस गए हैं। असम BJP इकाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें alleged तौर पर शर्मा को राइफल लेकर दो लोगों की ओर निशाना साधते और फायर करते हुए दिखाया गया है। वीडियो में एक व्यक्ति टोपी पहने हुए है और दूसरे के दाढ़ी है, और कैप्शन में लिखा है “Point Blank Shot।” इस वीडियो ने राजनीतिक गलियारों में और सोशल मीडिया पर चर्चा और आलोचना की लहर पैदा कर दी है। इसके चलते भाजपा और विपक्षी दलों के बीच गर्मागरम बहस शुरू हो गई है और सुप्रीम कोर्ट से मामले में हस्तक्षेप की मांग की गई है।

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संसद में बड़ा सियासी भूचाल, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की तैयारी

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संसद में बड़ा सियासी भूचाल, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की तैयारी

ओम बिरला: बजट सत्र की शुरुआत से ही संसद का माहौल लगातार तनावपूर्ण बना हुआ है। राष्ट्रपति के अभिभाषण के बाद धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। लगभग हर दिन लोकसभा की कार्यवाही हंगामे की भेंट चढ़ती रही, जिसके चलते स्पीकर ओम बिरला को कई बार सदन स्थगित करना पड़ा। विपक्षी दलों का आरोप है कि उन्हें अपनी बात रखने का पूरा अवसर नहीं दिया जा रहा, जबकि सत्ता पक्ष को प्राथमिकता मिल रही है। इसी मुद्दे को लेकर संसद के भीतर और बाहर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है और अब यह टकराव एक बड़े राजनीतिक कदम की ओर बढ़ता दिख रहा है।

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की तैयारी

सूत्रों के मुताबिक विपक्षी दलों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि आज लोकसभा की कार्यवाही शुरू होने से पहले कई विपक्षी नेता कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर पहुंचे, जहां इस मुद्दे पर अहम बैठक हुई। इस बैठक में विभिन्न विपक्षी दलों ने मौजूदा संसदीय हालात और स्पीकर की भूमिका पर चर्चा की। विपक्ष का मानना है कि सदन की कार्यवाही निष्पक्ष रूप से नहीं चलाई जा रही और यही वजह है कि अब संवैधानिक प्रक्रिया के तहत अविश्वास प्रस्ताव लाने का विकल्प चुना जा रहा है। माना जा रहा है कि इस कदम से संसद की राजनीति और ज्यादा गरमा सकती है।

संसद में बड़ा सियासी भूचाल, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की तैयारी

सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव चरम पर

बजट सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव इस कदर बढ़ गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर हुई चर्चा का जवाब भी पूरा नहीं दे सके। विपक्ष खासकर कांग्रेस की महिला सांसदों ने सदन में जोरदार विरोध किया और प्रधानमंत्री की सीट के पास तक पहुंच गईं। इस कारण प्रधानमंत्री को अपना भाषण बीच में ही रोकना पड़ा। स्पीकर की ओर से विपक्ष को शांत करने और सदन की गरिमा बनाए रखने की कई कोशिशें की गईं, लेकिन हंगामा थमने का नाम नहीं ले रहा था। इसी दौरान सदन के कामकाज में बाधा डालने के आरोप में विपक्ष के आठ सांसदों को निलंबित कर दिया गया, जिसे लेकर विपक्ष और अधिक आक्रामक हो गया।

राहुल गांधी, निलंबन और नोटिस की रणनीति

विपक्ष की नाराजगी का एक बड़ा कारण राहुल गांधी को लोकसभा में बोलने न दिए जाने का मुद्दा भी है। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने पूर्व सेनाध्यक्ष एमएम नरवणे की एक अप्रकाशित पुस्तक के अंश पढ़ते हुए चीन और लद्दाख से जुड़े मसले उठाए थे। चेयर की ओर से यह कहा गया कि किसी अप्रकाशित पुस्तक के अंश पढ़ना संसदीय नियमों के खिलाफ है, जिसके बाद भारी हंगामा हुआ। विपक्ष लगातार राहुल गांधी को बोलने देने और निलंबित किए गए आठ सांसदों की बहाली की मांग कर रहा है। सूत्रों का कहना है कि लगभग सभी विपक्षी दल स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर सहमत हो चुके हैं और जल्द ही लोकसभा महासचिव को इसका औपचारिक नोटिस सौंपा जा सकता है। अगर ऐसा होता है तो यह मौजूदा संसद सत्र का सबसे बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम साबित हो सकता है।

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First census: जनसंख्या का रिकॉर्ड इतिहास, 9 फरवरी से जुड़ा भारत का सबसे बड़ा प्रशासनिक कदम

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First census: जनसंख्या का रिकॉर्ड इतिहास, 9 फरवरी से जुड़ा भारत का सबसे बड़ा प्रशासनिक कदम

First census: आज भारत दुनिया का सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश बन चुका है। अनुमान के अनुसार देश की आबादी 147 करोड़ से भी ज्यादा हो चुकी है। इतनी बड़ी आबादी की सही गिनती करना अपने आप में एक विशाल और जटिल प्रशासनिक कार्य है। इसी प्रक्रिया को जनगणना कहा जाता है जिसे भारत के सबसे बड़े सरकारी अभियानों में गिना जाता है। भारत के इतिहास में 9 फरवरी का दिन इसलिए खास माना जाता है क्योंकि इसी दिन साल 1951 में आजाद भारत की पहली जनगणना की शुरुआत हुई थी। यह जनगणना केवल आंकड़ों का संग्रह नहीं थी बल्कि आजादी के बाद देश की सामाजिक, आर्थिक और धार्मिक स्थिति को समझने का एक मजबूत आधार भी बनी।

1951 की पहली जनगणना कब और कैसे हुई

आजाद भारत की पहली जनगणना 9 फरवरी 1951 को शुरू हुई थी और यह 28 फरवरी 1951 तक चली थी। इसके बाद 1 मार्च से 3 मार्च तक पुनरीक्षण का कार्य किया गया ताकि किसी भी तरह की त्रुटि को सुधारा जा सके। इस जनगणना के दौरान नागरिकों से नाम, पारिवारिक संबंध, जन्म स्थान, लिंग, आयु, आर्थिक स्थिति, आजीविका के साधन, धर्म, मातृभाषा और साक्षरता जैसी विस्तृत जानकारियां जुटाई गईं। भारत के बंटवारे के बाद देश की सीमाएं बदल चुकी थीं। बड़ी संख्या में लोगों का पलायन हुआ था और धार्मिक आधार पर जनसंख्या का संतुलन भी बदला था। इन्हीं कारणों से 1951 की जनगणना ऐतिहासिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है क्योंकि इसी ने नए भारत की वास्तविक तस्वीर दुनिया के सामने रखी।

First census: जनसंख्या का रिकॉर्ड इतिहास, 9 फरवरी से जुड़ा भारत का सबसे बड़ा प्रशासनिक कदम

1951 की जनसंख्या और सामाजिक स्थिति

1951 की जनगणना के अनुसार उस समय भारत की कुल जनसंख्या 36 करोड़ 10 लाख 88 हजार 90 थी। उस दौर में देश की साक्षरता दर बेहद कम थी और केवल लगभग 18 प्रतिशत लोग ही पढ़े लिखे थे। औसत जीवन प्रत्याशा मात्र 32 वर्ष थी जो उस समय स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति को दर्शाती है। लिंगानुपात की बात करें तो प्रति 1000 पुरुषों पर महिलाओं की संख्या 946 थी। धार्मिक आंकड़ों के अनुसार भारत की जनसंख्या में 84.1 प्रतिशत हिंदू, 9.8 प्रतिशत मुस्लिम, 2.3 प्रतिशत ईसाई, 1.9 प्रतिशत सिख और शेष अन्य धर्मों के लोग शामिल थे। ये आंकड़े उस समय के सामाजिक ढांचे और जीवन स्तर को समझने में अहम भूमिका निभाते हैं।

वर्तमान जनसंख्या और भारत में जनगणना का इतिहास

वर्तमान समय में भारत चीन को पीछे छोड़ते हुए दुनिया का सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश बन गया है। पीआईबी के अनुसार भारत की जनसंख्या में हर साल करीब 1.5 करोड़ लोगों की वृद्धि होती है जो विश्व में सबसे अधिक है। दुनिया की कुल आबादी का लगभग 17 प्रतिशत हिस्सा भारत में निवास करता है। विभिन्न रिपोर्टों के मुताबिक भारत की आबादी 147 करोड़ के आंकड़े को पार कर चुकी है और साक्षरता दर बढ़कर 80 प्रतिशत से अधिक हो गई है। भारत में जनगणना हर 10 साल में कराई जाती है। साल 2011 में आखिरी जनगणना हुई थी जबकि 2021 की जनगणना कोरोना महामारी और अन्य कारणों से टल गई। भारत में आधुनिक जनगणना की शुरुआत ब्रिटिश शासन में हुई थी जब 1872 में लॉर्ड मेयो के समय पहली बार यह प्रक्रिया कराई गई। नियमित जनगणना 1881 से शुरू हुई और तब से हर दशक में यह प्रक्रिया जारी रही। इससे भी पहले ऋग्वेद, कौटिल्य के अर्थशास्त्र और अकबर की आईन ए अकबरी में जनसंख्या गणना के उल्लेख मिलते हैं जो बताते हैं कि भारत में जनगणना की परंपरा बेहद प्राचीन रही है।

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