देश
Ladakh violence: चार युवाओं की मौत, सोनम वांगचुक गिरफ्तार, NSA लागू, प्रशासन पर बढ़ा दबाव और जांच का आदेश
Ladakh violence: लद्दाख में दशकों में सबसे गंभीर हिंसा देखी गई, जिसमें पुलिस ने जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को गिरफ्तार किया और उनके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) लगाया। इस हिंसा के पीछे की घटनाओं का विश्लेषण करते हुए, लद्दाख ऑटोनॉमस हिल डेवलपमेंट काउंसिल के सीईओ ताशी ग्यालसन ने बताया कि शुरू में भूख हड़ताल शांतिपूर्ण थी और व्यापक मांगों के लिए आयोजित की गई थी।
अफवाहों और उत्तेजक बयानों ने भड़काई आग
ताशी ग्यालसन ने कहा कि लोगों ने सरकार पर भरोसा रखा क्योंकि प्रशासन समय-समय पर वार्ता कर रहा था और लद्दाख को संवैधानिक सुरक्षा दिलाने का आश्वासन दे रहा था। बावजूद इसके, अफवाहें फैलने लगीं कि सरकार गंभीर नहीं है और संवैधानिक सुरक्षा सुनिश्चित नहीं करेगी। कुछ उत्तेजक लोगों ने बयान देना शुरू कर दिया, जिससे अप्रत्याशित रूप से हिंसा भड़क उठी।
#WATCH | Leh, Ladakh | On violent protests, Ladakh Autonomous Hill Development Council CEO Tashi Gyalson says, "… Innocent people who had come for a peaceful protest, somehow the crowd got mobilised, and suddenly the violence started… The ongoing hunger strike was quite… pic.twitter.com/qpkeLcWA08
— ANI (@ANI) September 27, 2025
पुलिस कार्रवाई और गंभीर परिणाम
24 सितंबर को हुई इस हिंसा के दौरान पुलिस ने अत्यधिक बल का प्रयोग किया, जिससे चार युवकों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए। ताशी ग्यालसन ने कहा कि इस हिंसा में शामिल सभी लोगों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए और पुलिस के अत्यधिक बल प्रयोग की भी जांच होनी चाहिए। उन्होंने लद्दाख के लेफ्टिनेंट गवर्नर से इस मामले की पूरी और पारदर्शी जांच कराने की मांग की।
सोनम वांगचुक पर आरोप
इस बीच, केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने सोनम वांगचुक और उनके द्वारा बनाई गई एक संगठन के खिलाफ प्रारंभिक जांच शुरू की है। उन पर विदेशी योगदान (नियमन) अधिनियम 2010 (FCRA) के उल्लंघन का आरोप है। केंद्रीय सरकार का आरोप है कि वांगचुक ने अरब स्प्रिंग जैसी प्रदर्शनों और नेपाल में जन-जी आंदोलन का हवाला देकर जनता को गुमराह किया।
कर्फ्यू और स्थिति की गंभीरता
हिंसा के कारण लद्दाख के सबसे बड़े शहर लेह में कर्फ्यू लगा दिया गया। कम से कम चार लोग मारे गए और 70 से अधिक लोग घायल हुए। प्रशासन और सुरक्षा बल स्थिति पर नियंत्रण पाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। ताशी ग्यालसन ने जनता से अपील की कि संयम बनाए रखें और सरकार को वार्ता के माध्यम से समाधान खोजने का समय दें।
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India-Bangladesh Relations: क्या पाकिस्तान उठा रहा है भारत-बांग्लादेश हालात का फायदा, संसद में उठा मुद्दा
India-Bangladesh Relations: संसद के बजट सत्र के दौरान शुक्रवार 6 फरवरी 2026 को लोकसभा में भारत और बांग्लादेश के द्विपक्षीय संबंधों को लेकर गंभीर सवाल उठे। जनता दल यूनाइटेड के सांसद गिरिधारी यादव, दिनेश चंद्र यादव और रामप्रीत मंडल ने केंद्र सरकार से पूछा कि क्या मौजूदा समय में भारत और बांग्लादेश के रिश्ते किसी संवेदनशील दौर से गुजर रहे हैं। सांसदों ने यह भी जानना चाहा कि अगर ऐसा है तो इसके पीछे क्या कारण हैं और इसका भारत के राष्ट्रीय हितों पर क्या असर पड़ सकता है। सवालों के दौरान यह आशंका भी जताई गई कि कहीं पाकिस्तान इस स्थिति का फायदा उठाने की कोशिश तो नहीं कर रहा है। इसके साथ ही बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों विशेषकर हिंदुओं के खिलाफ हिंसा और सार्वजनिक हत्याओं की खबरों को लेकर सरकार के रुख पर भी स्पष्ट जवाब मांगा गया।
क्या पाकिस्तान उठा सकता है हालात का फायदा
जदयू सांसदों ने विदेश मंत्रालय से यह भी पूछा कि भारत-बांग्लादेश संबंधों में यदि किसी तरह की नरमी या तनाव है तो क्या पाकिस्तान जैसे देश इसका रणनीतिक लाभ उठाने का प्रयास कर रहे हैं। सांसदों का कहना था कि पड़ोसी देशों के बीच किसी भी तरह की अस्थिरता का सीधा असर राष्ट्रीय सुरक्षा पर पड़ सकता है। इसके अलावा उन्होंने यह भी सवाल किया कि बांग्लादेश में अंतरिम सरकार के गठन के बाद अल्पसंख्यकों के खिलाफ सामने आई घटनाओं पर भारत सरकार ने क्या कोई औपचारिक बातचीत की है। सांसदों ने चिंता जताई कि अगर समय रहते इन मुद्दों को गंभीरता से नहीं लिया गया तो क्षेत्रीय स्थिरता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह का जवाब
सवालों का जवाब देते हुए विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने लोकसभा को बताया कि भारत और बांग्लादेश पड़ोसी देश होने के साथ-साथ गहरे ऐतिहासिक, भौगोलिक, सांस्कृतिक, भाषाई और सामाजिक संबंध साझा करते हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के रिश्ते लोगों के विकास और आपसी सहयोग पर आधारित हैं। मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत और बांग्लादेश के बीच कई संस्थागत द्विपक्षीय तंत्र सक्रिय हैं जिनके तहत नियमित संवाद, बैठकें और आदान-प्रदान होते रहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक, स्थिर, शांतिपूर्ण और समावेशी बांग्लादेश का समर्थन करता है और यह संदेश अंतरिम सरकार को सभी प्रासंगिक मंचों पर दिया गया है। मंत्री ने जोर देकर कहा कि बांग्लादेश के साथ भारत के संबंध किसी तीसरे देश के साथ उसके रिश्तों से स्वतंत्र हैं।
अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर भारत की सख्त नजर
विदेश राज्य मंत्री ने सदन को बताया कि भारत सरकार बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह सजग है। यह मुद्दा बांग्लादेशी अधिकारियों के समक्ष कई बार उच्चतम स्तर पर उठाया जा चुका है। उन्होंने जानकारी दी कि प्रधानमंत्री ने 4 अप्रैल 2025 को मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस के साथ बैठक में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया था। इसके अलावा विदेश मंत्री ने 16 फरवरी 2025 को विदेश सलाहकार तौहीद हुसैन के साथ मुलाकात में भी इस विषय पर चर्चा की थी। मंत्री ने कहा कि भारत सरकार बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों से जुड़ी हर रिपोर्ट पर लगातार नजर रख रही है। साथ ही उन्होंने यह भी दोहराया कि बांग्लादेश के सभी नागरिकों, जिनमें धार्मिक और जातीय अल्पसंख्यक भी शामिल हैं, के जीवन, स्वतंत्रता और कल्याण की रक्षा करना वहां की सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
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Manipur Violence: मणिपुर में नई सरकार के 24 घंटे बाद भड़की हिंसा, चूराचांदपुर में तनाव फैल गया
Manipur Violence: मणिपुर के चूराचांदपुर में उपमुख्यमंत्रियों नेमचा किपगेन और लोसी दीखो के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान फिर हिंसा भड़क उठी है। इस दौरान सुरक्षाबलों और भीड़ के बीच झड़पें हुईं। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस का उपयोग किया। मणिपुर में पिछले कई वर्षों से जारी हिंसा के बीच केंद्र सरकार ने पिछले साल राष्ट्रपति शासन लगाया था। इसके बाद हाल ही में युमनाम खेमचंद सिंह की अगुवाई में नई सरकार बनी थी।
सरकार गठन के 24 घंटे बाद ही हिंसा का विस्फोट
मणिपुर में राष्ट्रपति शासन हटने और युमनाम खेमचंद सिंह की नई सरकार के गठन के मात्र 24 घंटे बाद ही हिंसा की स्थिति पैदा हो गई। कूकी समुदाय के समूहों ने चूराचांदपुर में सड़कों पर उतरकर अपने समुदाय के विधायकों को सरकार गठन में भाग लेने से मना किया। उन्होंने पूर्ण बंद और प्रदर्शन का आह्वान भी किया। कई जगहों से फायरिंग की खबरें भी मिलीं। कूकी-जॉ क्षेत्र में संयुक्त मोर्चा 7 ने 12 घंटे के बंद का एलान किया है।

नेमचा किपगेन की नियुक्ति से कूकी-जॉ समुदाय में नाराजगी
हिंसा की मुख्य वजह उपमुख्यमंत्री पद पर नेमचा किपगेन की नियुक्ति को लेकर कूकी-जॉ समुदाय में रोष है। कूकी-जॉ विधायक की सरकार में भागीदारी से समुदाय में असंतोष पनपा है, जिससे चूराचांदपुर जिले में नए सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। तुइबोंग इलाके में तनावपूर्ण स्थिति बनी रही, जिसके चलते प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच तीव्र झड़पें हुईं। स्थानीय प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए भारी संख्या में सुरक्षा बल तैनात किए हैं।
सुरक्षा व्यवस्था कड़ी, स्थिति पर कड़ी नजर
घटना के बाद इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है ताकि स्थिति और बिगड़ने से रोका जा सके। प्रशासन ने सभी संबंधित पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। वहीं, तनाव की वजह से स्थानीय लोग दहशत में हैं और अपने घरों में सीमित रहना पसंद कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में लेने के लिए सभी संभव कदम उठाए जा रहे हैं। आने वाले समय में हालात सुधारने के लिए राजनीतिक स्तर पर भी प्रयास जारी हैं।
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