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Air India का बड़ा कदम! पायलट्स के लिए रिक्रूटमेंट शुरू, Indigo संकट में सोशल मीडिया पर मचा हड़कंप
इंडिगो एयरलाइन के हालिया संकट के बीच, Air India ने पायलटों की भर्ती के लिए घोषणा की है। कंपनी ने एक विज्ञापन जारी किया है, जिसमें कहा गया है कि “आकाश की कोई सीमा नहीं है, और यह केवल शुरुआत है।” एयर इंडिया ने अनुभवी पायलटों से आवेदन करने का आग्रह किया है। यह भर्ती Airbus A320 और Boeing 737 विमान फ्लीट के लिए की जा रही है। हालांकि यह एक सामान्य भर्ती विज्ञापन है, लेकिन इंडिगो के वर्तमान संकट के कारण यह सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में आ गया है।
इंडिगो संकट और इसके कारण
इंडिगो के संकट की शुरुआत पिछले सप्ताह से हुई है, जब भारत के नागरिक उड्डयन क्षेत्र में उड़ानों में व्यवधान, रद्दीकरण, देरी और पुनःनिर्धारण की घटनाएं सामने आईं। यह संकट इंडिगो में पायलट और क्रू की अचानक कमी के कारण उत्पन्न हुआ। समस्या तब और गंभीर हुई, जब इंडिगो ने नियामक Directorate General of Civil Aviation (DGCA) द्वारा पिछले साल जारी किए गए Flight Duty Time Limitation (FDTL) नियमों को लागू किया। इन नियमों के तहत पायलटों को उड़ानों के बीच पर्याप्त विश्राम दिया जाता है और अन्य आवश्यक शर्तें पूरी की जाती हैं। इसके चलते इंडिगो के उड़ान कार्यक्रम पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा।
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Air India का भर्ती विज्ञापन और शर्तें
Air India ने अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में कहा, “भारतीय विमानन के भविष्य को कमांड करें। हम अपनी बढ़ती फ्लीट में अनुभवी B737 और A320 पायलटों को आमंत्रित कर रहे हैं। कृपया 22 दिसंबर तक आवेदन जमा करें।” एयर इंडिया ने बताया कि A320 फ्लीट के लिए अनुभवी “टाइप-रेटेड” पायलटों की आवश्यकता है। वहीं B737 फ्लीट के लिए एयरलाइन “टाइप-रेटेड” और “नॉन-टाइप-रेटेड” दोनों प्रकार के अनुभवी पायलटों की भर्ती करना चाहती है। टाइप-रेटिंग एक प्रमाणन है जो पायलट को किसी विशेष विमान प्रकार पर प्रशिक्षण और परीक्षण पूरा करने के बाद प्राप्त होता है।
FDTL नियम और इंडिगो पर प्रभाव
Air India की यह भर्ती उसी समय हुई है जब इंडिगो अपने उड़ान संचालन को स्थिर करने की कोशिश कर रही है, जो नए FDTL नियमों के कारण प्रभावित हुए हैं। FDTL नियम पायलटों के पर्याप्त विश्राम को सुनिश्चित करते हैं, जिससे उड़ानों की सुरक्षा और दक्षता बनी रहती है। हालांकि, इन नियमों के कारण इंडिगो को अपने फ्लाइट शेड्यूल में लगातार बदलाव करने पड़े और नई पायलट भर्ती की आवश्यकता बढ़ गई। इस स्थिति में एयर इंडिया ने अपने लाभ के लिए तुरंत अनुभवी पायलटों की भर्ती का अवसर अपनाया, जिससे भारतीय विमानन क्षेत्र में इसकी स्थिति मजबूत हो सकती है।
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Galwan War Memorial: कठोर तापमान और दुर्गम पहाड़ों के बीच, 2020 की रात की वीरता अब अमर है
Galwan War Memorial: लद्दाख की वीर भूमि में, समुद्र तल से 14,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित गलवान घाटी में भारत के शौर्य और सर्वोच्च बलिदान को समर्पित गलवान वॉर मेमोरियल तैयार किया गया है। माइनस 30 डिग्री सेल्सियस जैसी कठोर ठंड और दुर्गम भूभाग के बावजूद यह स्मारक देशभक्ति का प्रतीक बनकर उभरा है। यह केवल एक संरचना नहीं है, बल्कि उन भारतीय सपूतों के प्रति कृतज्ञता और सम्मान का प्रतीक है, जिन्होंने 15 जून 2020 की रात में अपने जीवन का सर्वोच्च बलिदान दिया और इतिहास रच दिया।
वीर सपूतों को श्रद्धांजलि
गलवान घाटी की कठिन परिस्थितियों में भारतीय सेना के 20 बहादुर सैनिकों ने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राण न्यौछावर किए। उनका साहस, समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा सदियों तक भारतीयों के हृदय में अमर रहेगी। उन्हीं वीरों के पराक्रम और शौर्य को याद करने के लिए यह स्मारक बनाया गया। गलवान वॉर मेमोरियल न केवल उनकी वीरगाथा को आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाएगा, बल्कि युवाओं में देशभक्ति और साहस की भावना को भी जागृत करेगा।
कठिन वातावरण में भव्य निर्माण
गलवान वॉर मेमोरियल का निर्माण 14,500 फीट की ऊंचाई पर हुआ है, जहां सांस लेना भी चुनौतीपूर्ण है और तापमान अत्यंत कम रहता है। इन कठिन परिस्थितियों के बावजूद स्मारक का भव्य और प्रभावशाली स्वरूप तैयार किया गया, जो भारतीय सेना की दृढ़ता और संकल्प का प्रतीक है। स्मारक का डिजाइन बड़े त्रिशूल के रूप में किया गया है, जिसके मध्य में शाश्वत ज्योति प्रज्वलित है, जो अमर वीरों के बलिदान का प्रतीक है। स्मारक की ऊंचाई पर लहराता हुआ राष्ट्रीय ध्वज हर आगंतुक के मन में गर्व की भावना पैदा करता है। इसके चारों ओर गलवान के वीर सैनिकों की कांस्य प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं।
स्मारक में आधुनिक सुविधाएं और पर्यटन संभावनाएं
गलवान वॉर मेमोरियल में लाल और विभिन्न रंगों के ग्रेनाइट का उपयोग किया गया है, जो बहादुरी और बलिदान का प्रतिनिधित्व करता है। परिसर में आधुनिक संग्रहालय और डिजिटल गैलरी भी बनाई गई है, जिसमें भारतीय सेना की विरासत, गलवान के ऐतिहासिक क्षण, सैन्य तकनीक और ऑपरेशनों की जानकारी प्रदर्शित की गई है। इसके अलावा ऑडिटोरियम विकसित किया गया है, जहां आगंतुक गलवान की घटनाओं और सैनिकों की वीरगाथाओं के बारे में जान सकते हैं। यह परियोजना वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के अंतर्गत पर्यटन को बढ़ावा देगी, दूर-दराज के क्षेत्रों से आवाजाही को सुगम बनाएगी और स्थानीय समुदाय के विकास में योगदान देगी। आने वाले समय में यह स्मारक उन सभी भारतीयों के लिए रणभूमि का दर्शन बनेगा, जो अपने वीर सपूतों को श्रद्धांजलि देना चाहते हैं।
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CM Saini के नेतृत्व में हरियाणा में पेयजल सप्लाई हुई बहुत बेहतर, प्रदेश के लोग मुख्यमंत्री को अब मानते हैं ‘जलदाता’
CM Haryana Nayab Saini के नेतृत्व में हरियाणा में पेयजल सप्लाई कितनी बेहतर हुई है, इसका उदाहरण यह है कि आज हरियाणा के गांवों के साथ-साथ अब सरकार ढ़ाणियों में भी स्वच्छ पेयजल मुहैया करवाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग हरियाणा में 20 से अधिक घरों वाली ढाणियों में पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करेगा। इसके लिए विभाग सभी आवश्यक प्रबंध करेगा। चिन्हित की गई ढाणियों में अंबाला में 2, फरीदाबाद में 5, हिसार में 2, करनाल में 3, कुरुक्षेत्र में 5, मेवात (नूंह) में 7, पलवल में 2, पानीपत में 3 और सिरसा में 4 ढाणियां शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन ढाणियों में प्राथमिकता के आधार पर कार्य किए जाएं। हरियाणा में मुख्यमंत्री नायब सैनी के नेतृत्व जिस प्रकार से पेयजल आपूर्ति की जा रही है उसे देखते हुए हरियाणा के लोग मुख्यमंत्री को ‘जल-दाता’ का नाम भी देते हैं।
राज्य के ग्रामीण इलाकों की स्थिति
राज्य में गांवों की कुल संख्या 6804
40 एलपीसीडी से कम जल स्थिति वाले गांवों की संख्या 127
40-55 एलपीसीडी के बीच जल स्थिति वाले गांवों की संख्या 4062
जल स्थिति वाले गांवों की संख्या 70 एलपीसीडी 2615
कुल: 6804
“शहरी इलाकों” की स्थिति
उन शहरों की संख्या जहां जल आपूर्ति की स्थिति 135 एलपीसीडी से अधिक है 31
उन शहरों की संख्या जहां जल आपूर्ति की स्थिति 110-135 एलपीसीडी के बीच है 25
उन शहरों की संख्या जहां जल आपूर्ति की स्थिति 70-110 एलपीसीडी के बीच है 22
कुल: 78
जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग वर्तमान में 1870 नहर-आधारित जलघर, 12,920 नलकूप, 9 रैनीवेल तथा 4140 बूस्टिंग स्टेशन के माध्यम से प्रदेशभर में पेयजल उपलब्ध करा रहा है।
मुख्यमंत्री नायब सैनी किस प्रकार से प्रदेश के लोगों को स्वच्छ पेयजल देने की दिशा में काम कर रहे हैं इसका उदाहरण है कि हरियाणा सरकार ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति सुविधाएँ प्रदान करने के लिए जल आपूर्ति अधिनियम लागू करने की योजना बना रही है। इसके साथ ही, शहरी क्षेत्रों में सीवरेज और वर्षा जल प्रणालियों को कुशल और नियंत्रित तरीके से उपलब्ध कराने और उनका रखरखाव करने की भी योजना है। इससे वितरण प्रणाली में छेड़छाड़ जैसी अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी और गांवों व कस्बों के सभी हिस्सों में जलापूर्ति का समान वितरण सुनिश्चित होगा। सभी कस्बों या उन क्षेत्रों में जहां सीवरेज प्रणाली मौजूद है, सीवेज के उचित उपचार और निपटान के लिए सीवेज उपचार संयंत्रों का निर्माण आवश्यक है। वर्तमान में, 100 से ज्यादा सीवेज उपचार संयंत्र (एसटीपी) कार्यरत हैं। राज्य सरकार ने शहरी क्षेत्रों की अनधिकृत कॉलोनियों में सार्वजनिक स्टैंड पोस्ट के माध्यम से जलापूर्ति प्रदान करने का निर्णय लिया है। शहरी क्षेत्रों में अनधिकृत कॉलोनियों में मांग को पूरा करने के उद्देश्य से, विशेष रूप से ऐसी कॉलोनियों में रिवर्स ऑस्मोसिस (आरओ) प्लांट लगाने के माध्यम से एक पायलट परियोजना शुरू करने का प्रस्ताव है। यह खुली और पारदर्शी निविदाओं के माध्यम से किया जाएगा, जिसमें भूमि सरकार द्वारा उपलब्ध कराई जाएगी और शेष बुनियादी ढाँचा, जिसमें विपणन भी शामिल है, निजी भागीदार द्वारा उपलब्ध कराया जाएगा।
हरियाणा सरकार ग्रामीण और शहरी इलाकों में पर्याप्त और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के लिए बड़े स्तर पर पेयजल बुनियादी ढांचा तैयार कर रही है। जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग पूरे राज्य में 1870 नहर-आधारित जलघर, 12,920 नलकूप, 9 रैनीवेल और 4140 बूस्टिंग स्टेशनों के माध्यम से पानी की सप्लाई सुनिश्चित कर रहा है।
कच्चे पानी की उपलब्धता में कमी
सिरसा जिले में पेयजल आपूर्ति BEML भाखड़ा मेन लाइन पर आधारित है, जो कच्चे पानी का सालभर का मुख्य स्रोत है। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में नहर प्रणालियों से कच्चे पानी की उपलब्धता में कमी देखने को मिली है। बढ़ती आबादी, लोगों की बदलती जरूरतें और जलवायु परिवर्तन इस गिरावट की बड़ी वजह मानी जा रही हैं।
गर्मी के मौसम और असाधारण परिस्थितियों में, लोगों को पानी की कमी न हो इसके लिए टैंकरों के जरिए आपूर्ति की जाती है। जल जीवन मिशन के तहत हरियाणा ने प्रदेश के सभी 30,41,000 ग्रामीण परिवारों को नल कनेक्शन उपलब्ध करवाने में बड़ी उपलब्धि हासिल की।
प्रति व्यक्ति की दर से पानी की सप्लाई
सिरसा लोक सेवा क्षेत्र के लगभग सभी गांवों में 55 लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन की दर से पानी की सप्लाई की जा रही है। केवल दो गांव दहमन और खारा खेड़ी में पानी की मात्रा बढ़ाकर 40 से 55 लीटर प्रतिदिन करने का कार्य जारी है, जिसे 31 मार्च 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
शहरी क्षेत्रों में नहीं पानी की कमी
शहरी क्षेत्रों में पानी की कोई कमी नहीं है। सिरसा क्षेत्र में विभाग 456 नहर-आधारित जलघर, 886 नलकूप और 297 बूस्टर स्टेशनों के माध्यम से लोगों को साफ पेयजल उपलब्ध करा रहा है।
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