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Apple WWDC 2025: जून में होगा डेवलपर्स कॉन्फ्रेंस, iOS 19 और Apple Intelligence समेत कई बड़े ऐलान होंगे

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Apple WWDC 2025: जून में होगा डेवलपर्स कॉन्फ्रेंस, iOS 19 और Apple Intelligence समेत कई बड़े ऐलान होंगे

Apple WWDC 2025: Apple का सालाना डेवलपर्स कॉन्फ्रेंस WWDC 2025 इस साल जून में आयोजित किया जाएगा। इस कॉन्फ्रेंस में एप्पल iOS 19, iPadOS 19, MacOS और अन्य सॉफ्टवेयर अपडेट्स पेश करेगा। इसके अलावा, एप्पल इंटेलिजेंस (Apple Intelligence) को लेकर भी बड़े ऐलान होने की उम्मीद है। WWDC 2024 में एप्पल ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस फीचर्स को पहली बार अपने ऑपरेटिंग सिस्टम में शामिल किया था। इस साल कंपनी अपने AI फीचर्स और डिवाइसेज़ में नई तकनीकों का प्रदर्शन कर सकती है।

WWDC 2025: कब और कहां होगा इवेंट?

एप्पल ने पुष्टि की है कि उसका डेवलपर्स कॉन्फ्रेंस WWDC 2025 इस साल 9 जून से 13 जून तक आयोजित किया जाएगा। यह इवेंट अमेरिका के कैलिफोर्निया स्थित क्यूपर्टिनो (Cupertino) में एप्पल पार्क में होगा। इस इवेंट में डेवलपर्स और छात्रों को व्यक्तिगत रूप से शामिल होने का मौका मिलेगा। एप्पल ने यह भी घोषणा की है कि WWDC25 सभी डेवलपर्स के लिए मुफ्त रहेगा।

इस इवेंट के दौरान एप्पल अपने आगामी सॉफ्टवेयर और तकनीकी इनोवेशन को पेश करेगा। डेवलपर्स नए ऑपरेटिंग सिस्टम के अनुसार अपने ऐप्स को डिजाइन और टेस्ट कर सकेंगे।

iOS 19 और iPadOS 19 से जुड़े बड़े अपडेट

WWDC 2025 में iOS 19 और iPadOS 19 को लॉन्च किया जाएगा। एप्पल ने iOS 18 में AI-आधारित फीचर्स को पेश किया था, जिससे आईफोन यूजर्स को अधिक पर्सनलाइज्ड अनुभव मिला। इस बार iOS 19 में और भी ज्यादा AI-आधारित सुविधाएं दी जा सकती हैं, जैसे:

  • स्मार्ट नोटिफिकेशन: iOS 19 में नोटिफिकेशन को मैनेज करने के लिए अधिक इंटेलिजेंट फीचर आ सकता है।

  • ऑटोमैटिक टास्क मैनेजमेंट: नया ऑपरेटिंग सिस्टम उपयोगकर्ता के व्यवहार को समझकर काम को ऑटोमैटिक रूप से शेड्यूल करेगा।

  • बेहतर सिरी अनुभव: एप्पल अपने वॉयस असिस्टेंट सिरी को अपग्रेड कर सकता है, जिससे वह अधिक स्वाभाविक रूप से प्रतिक्रिया दे सके।

MacOS और अन्य प्लेटफॉर्म में बड़े बदलाव

एप्पल WWDC 2025 में MacOS का नया वर्जन भी लॉन्च करेगा। इसमें AI-इंटीग्रेशन और बेहतर परफॉर्मेंस फीचर्स को शामिल किया जाएगा। इसके अलावा, WatchOS, tvOS और VisionOS के भी नए वर्जन लॉन्च होंगे।

Apple WWDC 2025: जून में होगा डेवलपर्स कॉन्फ्रेंस, iOS 19 और Apple Intelligence समेत कई बड़े ऐलान होंगे

  • MacOS 15: इसमें तेजी से काम करने वाले फीचर्स और AI-आधारित स्मार्ट टूल्स को शामिल किया जा सकता है।

  • WatchOS 12: एप्पल वॉच में हेल्थ ट्रैकिंग को और स्मार्ट बनाया जा सकता है, जिससे यूजर्स को अधिक सटीक स्वास्थ्य डेटा मिलेगा।

  • tvOS 19: Apple TV में नए फीचर्स और गेमिंग अनुभव को और बेहतर किया जा सकता है।

Apple Intelligence में होंगे नए फीचर्स

WWDC 2024 में एप्पल ने पहली बार अपने ऑपरेटिंग सिस्टम में AI फीचर्स को शामिल किया था। इस साल, Apple Intelligence को लेकर कई बड़े ऐलान हो सकते हैं।

  • AI पावर्ड फोटो एडिटिंग: एप्पल AI का उपयोग कर फोटो एडिटिंग को ऑटोमैटिक बना सकता है।

  • सिरी का अपग्रेडेड वर्जन: सिरी पहले से अधिक इंटेलिजेंट और स्वाभाविक रूप से बातचीत करने में सक्षम होगी।

  • टेक्स्ट टू इमेज फीचर: एप्पल अपने AI सिस्टम में टेक्स्ट से इमेज बनाने की क्षमता जोड़ सकता है।

इवेंट को कहां और कैसे देखें?

Apple WWDC 2025 का कीनोट इवेंट एप्पल के आधिकारिक यूट्यूब चैनल और वेबसाइट पर लाइव स्ट्रीम किया जाएगा। इसके अलावा, उपयोगकर्ता इसे Apple TV+ पर भी देख सकेंगे।

  • लाइव स्ट्रीम प्लेटफॉर्म:

    • Apple YouTube चैनल

    • Apple की आधिकारिक वेबसाइट

    • Apple TV+

Swift Student Challenge: छात्रों को मिलेगा विशेष मौका

WWDC 2025 के लिए एप्पल ने Swift Student Challenge को भी आयोजित किया है। इस प्रतियोगिता में भाग लेने वाले छात्रों को Apple Developers Conference में व्यक्तिगत रूप से शामिल होने का मौका मिलेगा।

  • आवेदन की तारीख: 27 मार्च 2025 से आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

  • फायदे: विजेता छात्रों को Apple Park में होने वाले इवेंट में भाग लेने का विशेष अवसर मिलेगा।

WWDC 2024 में हुए बड़े ऐलान

पिछले साल हुए WWDC 2024 में एप्पल ने VisionOS, iOS, iPadOS, MacOS, WatchOS और tvOS के नए वर्जन लॉन्च किए थे। इसके अलावा, iOS 18 को iPhone के लिए पूरी तरह से कस्टमाइज़ेबल बनाया गया था। WWDC 2024 में एप्पल ने AI फीचर्स का पहली बार प्रदर्शन किया था, जिससे सिरी अधिक स्मार्ट हो गई थी और डिवाइस का अनुभव और भी पर्सनलाइज्ड हो गया था।

क्या हो सकते हैं WWDC 2025 के सरप्राइज़?

WWDC 2025 में एप्पल अपने हार्डवेयर प्रोडक्ट्स को लेकर भी बड़ा ऐलान कर सकता है। अफवाहों के अनुसार, इस साल कंपनी नई iMac और MacBook सीरीज को पेश कर सकती है। इसके अलावा, एप्पल अपनी मिक्स्ड रियलिटी हेडसेट Vision Pro के नए वर्जन की भी घोषणा कर सकता है।

Apple WWDC 2025 डेवलपर्स और टेक्नोलॉजी प्रेमियों के लिए एक बड़ा इवेंट साबित होने वाला है। iOS 19, MacOS 15 और Apple Intelligence में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। इसके अलावा, Swift Student Challenge छात्रों के लिए एक सुनहरा अवसर है। WWDC 2025 को एप्पल की वेबसाइट, यूट्यूब और Apple TV+ पर लाइव देखा जा सकता है।

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नकली ऐप्स दिखते हैं असली जैसे जानिए कैसे पहचानें और बचाएं अपनी मेहनत की कमाई

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नकली ऐप्स दिखते हैं असली जैसे जानिए कैसे पहचानें और बचाएं अपनी मेहनत की कमाई

देश में इन दिनों फर्जी ट्रेडिंग ऐप्स के जरिए लोगों को ठगने के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इस गंभीर खतरे को देखते हुए सरकार ने नई एडवायजरी जारी की है और लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। ठग आकर्षक रिटर्न का लालच देकर लोगों को अपने जाल में फंसा रहे हैं और बाद में उनकी मेहनत की कमाई हड़प लेते हैं। सबसे खतरनाक बात यह है कि ये ऐप्स दिखने में बिल्कुल असली प्लेटफॉर्म जैसे लगते हैं जिससे आम लोगों के लिए असली और नकली के बीच फर्क करना बेहद मुश्किल हो जाता है। यही वजह है कि बड़ी संख्या में लोग इस स्कैम का शिकार हो रहे हैं।

कैसे काम करता है यह खतरनाक स्कैम

सरकारी एडवायजरी के अनुसार फर्जी ट्रेडिंग ऐप्स का इंटरफेस और डिजाइन बड़े और भरोसेमंद प्लेटफॉर्म्स जैसा बनाया जाता है। ठग सोशल मीडिया विज्ञापनों मैसेजिंग ऐप्स और फर्जी लिंक के जरिए लोगों को इन ऐप्स को डाउनलोड करने के लिए प्रेरित करते हैं। एक बार जब यूजर ऐप इंस्टॉल कर लेता है तो उसे निवेश के नाम पर पैसा जमा करने के लिए कहा जाता है। असल में यह पैसा किसी निवेश में नहीं लगता बल्कि सीधे ठगों के बैंक खातों में चला जाता है। कई बार यूजर को फर्जी डैशबोर्ड पर मुनाफा दिखाया जाता है ताकि वह और ज्यादा पैसा निवेश करे। इस तरह धीरे धीरे यूजर बड़ी रकम गंवा बैठता है।

नकली ऐप्स दिखते हैं असली जैसे जानिए कैसे पहचानें और बचाएं अपनी मेहनत की कमाई

बचाव के लिए जरूरी सावधानियां

सरकार ने इस तरह के स्कैम से बचने के लिए कुछ जरूरी सावधानियां बताई हैं जिनका पालन करना बेहद जरूरी है। सबसे पहले किसी भी ऐप में पैसा निवेश करने से पहले बैंक डिटेल्स को ऑफिशियल सोर्स से जरूर जांचें। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि पैसा सही जगह जा रहा है। दूसरी बात यह है कि हमेशा UPI हैंडल और पेमेंट गेटवे की सत्यता की जांच करें क्योंकि फर्जी ऐप्स अक्सर संदिग्ध पेमेंट विकल्प इस्तेमाल करती हैं। तीसरी और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि किसी भी ट्रेडिंग ऐप को डाउनलोड करने से पहले उसके वेरिफाइड लेबल या प्रमाणन को जरूर देखें। यह एक अहम संकेत होता है कि प्लेटफॉर्म सुरक्षित और कानूनी है।

स्कैम का शिकार होने पर तुरंत करें यह काम

अगर कोई व्यक्ति इस तरह के फाइनेंशियल स्कैम का शिकार हो जाता है तो उसे तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। देरी करने से पैसे वापस मिलने की संभावना कम हो जाती है। ऐसे मामलों में तुरंत नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करना चाहिए और पूरी जानकारी देनी चाहिए। इसके अलावा सरकार के साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। समय रहते सही कदम उठाने से नुकसान को कम किया जा सकता है और ठगों के खिलाफ कार्रवाई में मदद मिलती है।

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साइबर अपराध पर डिजिटल स्ट्राइक की तैयारी, सरकार ने बनाया बड़ा सुरक्षा प्लान

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साइबर अपराध पर डिजिटल स्ट्राइक की तैयारी, सरकार ने बनाया बड़ा सुरक्षा प्लान

पिछले कुछ वर्षों में साइबर क्राइम के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखी गई है। ऑनलाइन ठगी और डेटा चोरी के मामलों ने आम लोगों को आर्थिक नुकसान के साथ मानसिक तनाव भी दिया है। इसी गंभीर स्थिति को देखते हुए सरकार ने देशभर में साइबर अपराध के खिलाफ एक बड़ी रणनीति तैयार करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने साइबर फ्रॉड को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ते हुए कहा है कि डेटा चोरी और साइबर धोखाधड़ी देश के लिए बड़ा खतरा बन चुकी है। इस चुनौती से निपटने के लिए Indian Cyber Crime Coordination Centre के माध्यम से एक व्यापक योजना तैयार की जा रही है जो अलग अलग एजेंसियों को एक साथ जोड़कर काम करेगी।

2018 में हुई थी I4C की शुरुआत

I4C यानी इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर की स्थापना वर्ष 2018 में की गई थी। यह संस्था गृह मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करती है और देश में साइबर अपराध से निपटने के लिए एक नोडल एजेंसी के रूप में काम करती है। इसका मुख्य उद्देश्य विभिन्न राज्यों की पुलिस एजेंसियों बैंकिंग सिस्टम और अन्य संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है। I4C एक ऐसा प्लेटफॉर्म प्रदान करता है जहां सभी संबंधित एजेंसियां मिलकर साइबर अपराध की जांच और रोकथाम में सहयोग करती हैं। इससे न केवल मामलों की जांच तेज होती है बल्कि अपराधियों तक पहुंचना भी आसान हो जाता है।

साइबर अपराध पर डिजिटल स्ट्राइक की तैयारी, सरकार ने बनाया बड़ा सुरक्षा प्लान

शिकायत से लेकर कार्रवाई तक की पूरी प्रक्रिया

जब कोई नागरिक साइबर फ्रॉड की शिकायत हेल्पलाइन नंबर या ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से दर्ज करता है तो यह शिकायत सीधे I4C के अंतर्गत आने वाले सिस्टम में दर्ज हो जाती है। इसके बाद यह मामला ‘सिटीजन फाइनेंशियल साइबर फ्रॉड रिपोर्टिंग एंड मैनेजमेंट सिस्टम’ के माध्यम से संबंधित स्थानीय पुलिस और बैंक तक पहुंचता है। इस प्रक्रिया के जरिए ठगी के पैसे को तुरंत फ्रीज करने की कार्रवाई की जाती है ताकि अपराधियों को धन निकालने का मौका न मिले। रिपोर्ट के अनुसार इस प्रणाली के जरिए अब तक हजारों करोड़ रुपये की राशि को फ्रॉड होने से बचाया जा चुका है। इस पूरी प्रक्रिया के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया यानी SOP भी लागू है जिसमें पुलिस बैंक और अन्य एजेंसियां मिलकर काम करती हैं।

सिम कार्ड ब्लॉकिंग और सिम बाइंडिंग से कसा शिकंजा

सरकार केवल शिकायतों पर ही कार्रवाई नहीं कर रही है बल्कि साइबर अपराध में इस्तेमाल होने वाले सिम कार्ड और मोबाइल डिवाइस पर भी सख्ती बरत रही है। गृह मंत्रालय के अनुसार अब तक लाखों सिम कार्ड ब्लॉक किए जा चुके हैं और कई मोबाइल उपकरणों को भी निष्क्रिय किया गया है। इसके अलावा मैसेजिंग ऐप्स पर साइबर अपराध रोकने के लिए सिम बाइंडिंग को अनिवार्य किया जा रहा है। इस व्यवस्था के तहत यूजर का सिम और ऐप एक दूसरे से जुड़ा रहेगा जिससे फर्जी अकाउंट और धोखाधड़ी की संभावना कम हो जाएगी। सरकार ने सभी प्लेटफॉर्म्स को इसे लागू करने के लिए समय सीमा दी है और उम्मीद जताई जा रही है कि इन कदमों से साइबर अपराध के मामलों में उल्लेखनीय कमी आएगी।

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Microsoft Copilot पर बड़ा फैसला, अब गलती की जिम्मेदारी यूजर्स पर डाली

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Microsoft Copilot पर बड़ा फैसला, अब गलती की जिम्मेदारी यूजर्स पर डाली

टेक दिग्गज Microsoft ने अपने लोकप्रिय AI टूल Microsoft Copilot को लेकर एक बड़ा बदलाव किया है। कंपनी ने स्पष्ट कर दिया है कि Copilot का इस्तेमाल मुख्य रूप से मनोरंजन और सहायक टूल के तौर पर किया जाना चाहिए। इसके साथ ही कंपनी ने यह भी कहा है कि अगर AI किसी तरह की गलती करता है तो उसकी जिम्मेदारी यूजर की होगी, न कि Microsoft की। इस फैसले ने AI के उपयोग और उसकी विश्वसनीयता को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

Copilot क्या है और क्यों है खास

Copilot एक एडवांस AI टूल है जिसे काम को तेज और आसान बनाने के लिए डिजाइन किया गया है। यह Microsoft 365 जैसे प्लेटफॉर्म पर Excel, PowerPoint और Word जैसे ऐप्स के साथ काम करता है और यूजर्स की प्रोडक्टिविटी बढ़ाने में मदद करता है। शुरुआत में इसे एंटरप्राइज यूजर्स के लिए पेश किया गया था, लेकिन अब इसे आम यूजर्स तक भी पहुंचाया जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार Microsoft के पास Copilot नाम से जुड़े 70 से ज्यादा प्रोडक्ट मौजूद हैं, जो इसकी बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाते हैं।

Microsoft Copilot पर बड़ा फैसला, अब गलती की जिम्मेदारी यूजर्स पर डाली

AI की सीमाएं बनी बदलाव की वजह

इस बदलाव के पीछे सबसे बड़ी वजह AI की सीमाएं हैं। Copilot जैसे टूल Large Language Models पर आधारित होते हैं, जिनमें कभी-कभी गलत या काल्पनिक जानकारी देने की समस्या होती है, जिसे हैलुसिनेशन कहा जाता है। इसी तरह के AI मॉडल जैसे GPT और Claude भी कभी-कभी त्रुटियां कर सकते हैं। हालांकि इन तकनीकों में लगातार सुधार हो रहा है, लेकिन पूरी तरह सटीकता अभी भी एक चुनौती बनी हुई है। यही कारण है कि Microsoft ने अपनी जिम्मेदारी सीमित करने का फैसला लिया है।

यूजर्स के लिए क्या है नई सलाह

Microsoft ने यह साफ किया है कि Copilot अब भी काम के लिए उपयोगी है, लेकिन इसे अंतिम निर्णय लेने वाले सिस्टम के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। कंपनी की सलाह है कि यूजर्स Copilot से मिली जानकारी को एक संदर्भ के रूप में लें और महत्वपूर्ण मामलों में उसे जरूर जांचें। इसके साथ ही यह कदम संभावित कानूनी जोखिमों से बचने की रणनीति का भी हिस्सा है। दिलचस्प बात यह है कि इन बदलावों के बावजूद Microsoft Copilot को लगातार बेहतर बना रहा है और नए AI टूल्स पर काम कर रहा है, जिससे भविष्य में यह तकनीक और ज्यादा प्रभावी बन सके।

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